बाल कविता बाल साहित्य

समझदार गिलहरी (बाल कविता)

लकी गिलहरी लेकर आयी, बोरी भर अखरोट
देख चतुर खरहे के मन में, आया थोड़ा खोट

अखरोटों को पाने खातिर, सोचा एक उपाय
दौड़ लकी के पास गया और बोला – सिस्टर हाय!

बोरी मुझको दे दे, तेरा घर है काफी दूर
छोटी सी तू, हो जाएगी थककर बिल्कुल चूर

चतुर सोचता था कि बोरी आते अपने हाथ
भाग चलूँगा सरपट मैं तो छोड़ लकी का साथ

मगर लकी भी होशियार थी, समझ गयी सब खेल
कर डाली उसने खरहे की तुरंत योजना फेल

बोली, चतुर निकल जा जल्दी, मचा न दूँ मैं शोर
मुझे पता है एक नंबर का तू है शातिर चोर

परिचय - कुमार गौरव अजीतेन्दु

शिक्षा - स्नातक, कार्यक्षेत्र - स्वतंत्र लेखन, साहित्य लिखने-पढने में रुचि, एक एकल हाइकु संकलन "मुक्त उड़ान", चार संयुक्त कविता संकलन "पावनी, त्रिसुगंधि, काव्यशाला व काव्यसुगंध" तथा एक संयुक्त लघुकथा संकलन "सृजन सागर" प्रकाशित, इसके अलावा नियमित रूप से विभिन्न प्रिंट और अंतरजाल पत्र-पत्रिकाओंपर रचनाओं का प्रकाशन

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