सुमन-संगीत

सिडनी में नवम्बर महीना,
जामुनी फूलों का मौसम,
प्रकृति ने मानो जामुनी चूनर ओढ़ ली है.
लॉन पर जामुनी फूलों का गलीचा,
रस्ते में जामुनी फूल,
बस स्टॉप पर जामुनी फूल,
पेड़ों पर जामुनी फूल,
पौधों पर जामुनी फूल,
लताओं-बेलों पर जामुनी फूल,
एक छोटी-से कली में बिखरे हुए चालीसों जामुनी फूल,
अंगूर के गुच्छे जैसे जामुनी फूल,
शहनाई जैसे जामुनी फूल,
यानी जिधर देखो जामुनी-ही-जामुनी फूल,
लगता है जामुनी फूल गा रहे हैं-
”पांव छू लेने दो फूलों को इनायत होगी, इनायत होगी
वरना हमको नहीं, इनको भी शिकायत होगी, शिकायत होगी.”
यह शिकायत हम करते हैं, फूल नहीं,
ठंडी-लहराती हवा में उड़ती-बिखरती गुलाब की पत्तियां,
मानो खुश होकर गा रही थीं-
”ऐ फूलों की रानी बहारों की मलिका
तेरा मुस्कुराना गज़ब हो गया
न दिल होश में है न हम होश में हैं
नज़र का मिलाना गज़ब हो गया.”
फूलों का यह सुरीला संगीत मन को मुग्ध कर रहा था,
मन में मधुरिम भाव भर रहा था,
मन को समझा रहा था,
प्रकृति ने पाला है,
सुंदरता में ढाला है,
प्रकृति को समर्पित हो जाओ,
उसी की मौज में खो जाओ,
वह फिर से हमें पालेगी-ढालेगी,
खुशबू का उपहार देगी,
हम फिर से उसी को समर्पित हो जाएंगे,
झूम-झूमकर गाएंगे-
”ऐ फूलों की रानी बहारों की मल्लिका
तेरा मुस्कुराना गज़ब हो गया”
और
”पांव छू लेने दो फूलों को इनायत होगी, इनायत होगी”
यही इनायत हमारा नजराना है,
हमको तो हर हाल में झूम-झूमकर गाना है,
संगीत के सुर सजाना है,
संगीत के सुर सजाना है,
संगीत के सुर सजाना है.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।