गीतिका/ग़ज़ल

हद है यार।

अज्ञानी भी ज्ञान दे रहे, हद है यार।
अदला-बदली मान दे रहे, हद है यार।।

धन्ना सेठ बैठ जहाँ पर खाते हैं,
नौकर सारे जान दे रहे हद है यार।

बारिश में तो भीग रहे थे अच्छे से,
उसपर छप्पर तान दे रहे हद है यार।

देखा होता मायूसी भी रो देती,
उसपर भी मुस्कान दे रहे, हद है यार।

खुद को घिसकर हमने था कुछ नाम किया,
फिर से इक पहचान दे रहे, हद है यार।

जिसके खातिर हमने सबकुछ छोड़ दिया,
वो हमको ही तान दे रहे हद है यार।
…………..मानस

परिचय - सौरभ दीक्षित मानस

नामः- सौरभ दीक्षित पिडिट्स पताः- भवन संख्या 106, जे ब्लाक, गुजैनी कानपुर नगर पिन 208022, उत्तरप्रदेश मो 8004987487, 9760253965

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