लघुकथा

लघुकथा – खामोश प्रश्न

सुमन की चहकन से घर का कोना कोना चहका करता था |विवाह के बाद घर सूना हो गया एक उदासी जिसे रमा नाथ और लक्ष्मी दोनों छुपा रहे थे | तभी वीर आ आता है ; क्या हुआ माँ ! दीदी की की कमी लग रही है | दोनों मुस्कुरा देते हैं तू है न ! हमारा राजा बेटा वीर’ दोनों के गलबहियाँ डाल देता है | कल मोहित भी पढ़ाई पूरी करके वापस आ रहा है | अब उसका रोका कर देते है नौकरी लगते ही विवाह भी ,बहू के आने से छवि की कमी भी पूरी हो जाएगी घर फिर भर जाएगा खुशियों से |

धीरे – धीरे वो समय भी गया मोहित की शादी भी हो गयी | नीला ‘ मोहित के साथ ही कम्पनी में सॉफ्ट वेयर इंजीनियर थी |
घर की चहल पहल बढ़ती जा रही थी रमानाथ और लक्ष्मी बहुत खुश थे वीर का भी विवाह हो गया था | दोनों का पोते पोतियों के साथ मजे से समय गुजर रहा था | अचानक सब बदल गया मोहित और नीला ने सिंगापुर से आए ओफर लेटर को स्वीकार कर लिया |

वीर का भी ट्रान्सफर बंगलौर हो गया दोनों ही अपने अपने रास्ते हो लिए | मोहित सिंगापुर और वीर बैंगलौर शिफ्ट हो गए | रमानाथ और लक्ष्मी के घर मे एक बार फिर उदासी छा गयी थी | साल गुजर रहा था — बस था तो दीपावली का इंतज़ार… खामोशी टूटने और किलकारी गूंजने का इंतज़ार… सभी आ चुके थे रामनाथ और लक्ष्मी की खुशी का पारावार नहीं था | दो बेटे बहुओं और चार बच्चों से घर भर गया था |

अगले दिन सभी ड्रॉइंग रूम में साथ थे पर पर सन्नाटा पसरा था | समय एक वर्ष में ही कितना आगे निकल चुका था खामोशी ने भीड़ में भी अपने पाँव जमा लिए थे रिश्ते अकेले पड़ चुके थे | दादा -दादी , ताया – ताई , चाचा – चाची, भैया – दीदी ,पापा – मम्मी, बेटा- बेटी सब रिश्ते फीके थे काम के बाद बचे वक्त में केवल दो रिश्ते शेष थे ; गहरी खामोशी और मोबाइल
रामनाथ और लक्ष्मी आँखे दीवार पे लगी घड़ी पर थी आँखों में खामोश प्रश्न ?

 मंजूषा श्रीवास्तव ‘मृदुल’

*मंजूषा श्रीवास्तव

शिक्षा : एम. ए (हिन्दी) बी .एड पति : श्री लवलेश कुमार श्रीवास्तव साहित्यिक उपलब्धि : उड़ान (साझा संग्रह), संदल सुगंध (साझा काव्य संग्रह ), गज़ल गंगा (साझा संग्रह ) रेवान्त (त्रैमासिक पत्रिका) नवभारत टाइम्स , स्वतंत्र भारत , नवजीवन इत्यादि समाचार पत्रों में रचनाओं प्रकाशित पता : 12/75 इंदिरा नगर , लखनऊ (यू. पी ) पिन कोड - 226016