’अपनों’ की याद

हर सुबह की धूप, कुछ याद दिलाती है,
हर महकाती खुशबू , एक जादू जगाती है,
ज़िंदगी कितनी भी, व्यस्त क्यों न हो,
निगाहों पर सुबह-सुबह,
‘अपनों’ की याद आ ही जाती है.
‘अपनों’ की याद ही
ज़रूरत पड़ने पर धूप खिलाती है
छांव दिलाती है
बारिश कराती है
दिन को रात
और रात को दिन का
आभास कराती है
मुश्किलों में मदद बन जाती है
पीड़ा से राहत दिखाती है
बहुत बड़ी जादूगर है
‘अपनों’ की याद.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।