प्रयास

अभी-अभी पतिदेव की बाइ पास सर्जरी खत्म हुई थी. डॉक्टर ने भले ही ऑपरेशन सक्सेसफुल होने और पेशेंट को का खतरे से बाहर होना बताया था, घंटों अस्पताल की लॉबी में महज सब कुछ अच्छा होने की प्रतीक्षा करने को बेबस ममता का व्यथित होना और अतीत में खो जाना स्वाभाविक था.

”भाभी, भैय्या सिगरेट पीते हैं क्या?”

”नहीं तो!” ममता ने कहा जरूर था, पर उसका मन उसे सफेद झूठ बोलने के लिए कचोट रहा था.

‘धूम्रपान से घोर विनाश’ कविता लिखते समय भी उसका मन व्यथित हो उठा था. समाज को धूम्रपान की हानियों से अवगत कराने का प्रयास करने वाली लेखिका ममता लाख प्रयत्न करने पर भी अपने पति का धूम्रपान नहीं छुड़वा सकी थी.

ऐसा नहीं था कि ममता के पास तर्कों की कमी थी. तर्क बहुत थे और वह भी विज्ञान-सम्मत और चिकित्सा शास्त्र-सम्मत! लेकिन पुरुष प्रधान समाज में पतिदेव का एक अकाट्य तर्क ही ममता के मुख पर ताला लगाने के लिए पर्याप्त था- ”मेरे कुलीग के बारे में जानती तो हो! न सिगरेट, न शराब, न पान-मीट-मच्छी, उसके बाद भी दो-दो बाइ पास सर्जरियां, अब बोलो, तुम्हारे तर्क कहां ठहरते हैं?”

ऐसा नहीं था कि उसके पति को भी धूम्रपान से घोर विनाश होने अंदाजा न हो, पर पहले दोस्तों के कहने पर कभी-कभार सिगरेट पीना शुरु करके नौबत चेन स्मोकर तक आ पहुंची थी. हार्ट सर्जरी के लिए जिम्मेदार कारकों में से यह भी एक कारक हो सकता था, भले ही कोई माने-न-माने.

वहां तो उसकी एक न चली, पर धूम्रपान निषेध के बारे में औरों को जागरुक करके तंबाकू-शराब आदि किसी भी प्रकार के विषपान से बचाने का प्रयास तो कर ही सकती है. उसने वहीं बैठे-बैठे मोबाइल पर पोस्टर बनाकर पोस्ट कर दिया-

”नशा, नाश करता है आपकी शान,
न डालें खतरे में अपनी और अपनों की जान.”

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।