खुशियों का इजहार: लाया आपके लिए एक उपहार

खुशियों का इजहार करने का सबका अपना-अपना अंदाज़ होता है. कोई अकेले में खुशियों का इजहार करता है कोई मेले में, कोई केक काटकर खुश होता है कोई केक खिलाकर खुश होता है, कोई मौन के तरन्नुम में खुशियां मनाता है तो कोई डी.जे के शोर-शराबे में खुशियां मनाकर खुश होता है.
इस प्रसंग में मुझे एक वाकया याद आता है. मैं क्लास टीचर होने के नाते क्लास में हाजिरी ले रही थी. खुशियों का इजहार करने-करवाने का शौक होने के कारण मैं रोज हाजिरी से पहले रजिस्टर में से सबसे पहले सबकी डेट ऑफ बर्थ चेक करती थी, ताकि उस दिन अगर किसी का जन्मदिन हो तो मैं उसे विश कर सकूं. जिस भी बच्चे का जन्मदिन होता था, वह रंगबिरंगी प्राइवेट ड्रेस में आता था. सब बच्चों को पहले ही उसके जन्मदिन का पता लग जाता था और वे उसे विश करते थे. अमूमन हाजिरी के समय वह टॉफी या मिठाई बांटता था. ऐसे होता था खुशियों का इजहार.
एक दिन एक छात्रा स्कूल यूनीफॉर्म में आई थी, मैंने रजिस्टर में देखा, तो उस दिन उसका जन्मदिन था. मैंने उसको विश किया, उसकी कुछ सहेलियों ने भी उसे विश किया, लेकिन हमेशा जैसा शोर नहीं मचा. शायद इसलिए कि वह बांटने के लिए टॉफी या मिठाई नहीं ला पाई थी. मैंने सबको एक साथ उसे जोश से विश करने को कहा. सबने ऐसा ही किया. मैंने उनको बताया कि जैसे बांटने से विद्या बढ़ती है, उसी तरह बांटने से खुशियां भी बढ़ती हैं. अगर आपकी किसी सहेली के भाई-बहिन के जन्मदिन का पता लगे, तो उसकी भी खुशी मनाओ. इस प्रकार खुशियां अनगिनत हो जाएंगी. सचमुच छात्राओं ने ऐसा करना शुरु कर दिया.
आप सोच रहे होंगे बात करनी थी ‘खुशियों का इजहार: लाया आपके लिए एक उपहार’, यहां तो कोई और ही राग बजने लग गया. बजना था राग भैरवी, उसके बदले भीमपलासी कहां से आ गया! शायद हम भूल गए! जी नहीं भूले नहीं, मुद्दे पर यानी 20 नवंबर पर ही आ रहे हैं.
एक बार हमें एक सहेली ने 20 नवंबर को अपने सुपुत्र की शादी पर आने के लिए आमंत्रित किया. ”सचमुच 20 नवंबर को ही शादी है या हमारी शादी की सालगिरह मना रही हो!” हमने उससे पूछा.
”मुझे पता है कि उस दिन आपकी शादी की सालगिरह है. हर बार आपके यहां महफिल जमती है, इस बार हमारे यहां.” वह बहुत खुश होकर बोली.
लीजिए बातों-बातों में राज खुल गया! कोई बात नहीं. एक बात और बताए देते हैं. आपको तो पता ही है, कि तिवानी साहब जाने-माने लेखक हैं. उन्हें अनेक पुरस्कारों से पुरस्कृत किया गया है तथा उनकी कविताओं की एक किताब दिल्ली सरकार के सौजन्य से प्रकाशित हुई है. अभी हाल ही में उन्होंने एक प्रतियोगिता में दिए गए विषय पर इंग्लिश में एक आलेख लिखकर भेजा था, वह आलेख हम आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं. उसका परिणाम आने पर हम आपको उसके बारे में भी अवगत कराएंगे-

अब बात उपहार की भी कर लेते हैं! 30 सितंबर 2006 को सरकारी सेवा से हमारी सेवानिवृत्ति हुई थी. हमने इस अवसर पर खुशियों का इजहार करने के लिए अपने लोकप्रिय भजनों का संग्रह करवाया था. ”श्री हरि भजनामृत” शीर्षक के इस भजन-संग्रह की 500 कॉपियां हमने सप्रेम भेंट वितरित करने के लिए छपवाई थीं. वे पुस्तकें तो देश-विदेश में वितरित हो गईं, हमने जो टाइप किया था, वह भी इतने सालों में इधर-उधर हो गया. अभी भी बहुत-से लोगों को इस किताब की दरकार थी, सो हमने इसे दुबारा से टाइप किया और जिन लोगों ने अपनी ई.मेल दी उनको भेज दी. हमारे सुपुत्र ने इस विशेष अवसर के लिए इसकी ई.बुक बनाई है, हम आपको सप्रेम उपहार स्वरूप यह ई.बुक भेज रहे हैं.

इस आशा के साथ कि आप सप्रेम स्वीकार करेंगे.
चलते-चलते
आपको यह तो बताया ही नहीं कि हमारे विवाह की यह 52 वीं सालगिरह है. आज ऑस्ट्रेलिया में हमारा स्कूल डे भी है, हमने पूरे स्कूल के लिए मिठाई बनाई है. अभी-अभी खबर आई है, कि आज ही हमारे दोहते मेहुल को डॉक्टरी की डिग्री भी मिलने वाली है.
लीला तिवानी

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।