अयोध्या विवाद – निर्णायक समापन की ओर

देश का सबसे पुराना और ऐतिहासिक विवाद जिसके कारण देश की राजनीति में भी कई रोमांचकारी मोड़ आते रहे अब वह धीरे-धीरे समापन की ओर अग्रसर है। अयोध्या विवाद के संपूर्ण और स्पष्ट समाधान के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने जो भूमिका अदा की है वह अत्यंत सराहनीय व एक ऐतिहासिक घटना के रूप में सदा याद की जायेगी। साथ ही विवाद से संबंधित सभी पक्षकारों की भूमिका, रणनीति और सभी का धैर्य सराहनीय व स्वागत योग्य है। नौ नंवबर 2019 का दिन भारत के इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जायेगा। यह दिन न्यायपालिका से लेकर देश व प्रदेश में शांति व्यवस्था को बहाल रखने में अपनी भूमिका अदा करने वालों तथा प्रदेश के पुलिसबल के जवानों के लिए भी काफी ऐतिहासिक व अविस्मरणीय रहा क्योंकि उन्होंने अपनी जिम्मदोरी का निर्वाहन भी पूरी सजगता के साथ किया।
फैसला आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया और फिर अभी हाल ही में रेडियो में ‘मन की बात’ में अपने विचारों के माध्यम से विवादों का पटाक्षेप करने में अति महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। जब अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में बहस चल रही थी तब भी लोगों के मन में तरह-तरह के विचारों का मंथन हो रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर सभी पक्षों को धैर्य व शांति के साथ सुनने के बाद पूरी स्पष्टता के साथ राम मंदिर के पक्ष में अपना अंतिम व ऐतिहासिक फैसला सुना दिया, जिसके बाद हिंदू समाज में खुशी की लहर दौड़ना स्वाभाविक था। अब देशभर में सभी प्रकार की जिज्ञासाओं व विवादों का अंत हो चुका है।
अयोध्या विवाद के प्रति मुस्लिम पक्षकारों को लेकर कुछ संशय व भय था जिसको लेकर तरह -तरह की संभावनाएं व्यक्त की जा रही थीं। लेकिन जब पीएम मोदी ने अपने मन की बात में अयोध्या विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरे देश ने फैसले पर जिस प्रकार से धैर्य, संयम व परिपक्वता का परिचय दिया है उससे साबित होता है कि भारतीयों के लिए राष्ट्रहित से बढ़कर कुछ भी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न्यायपालिका के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद देश अब नई उम्मीदों, आकांक्षाओं और नये इरादे के साथ नये रास्ते पर चल पड़ा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जहां एक ओर लंबे समय के बाद कानूनी लड़ाई समाप्त हुई है, वहीं देश में न्यायपालिका के प्रति सम्मान और बढ़ गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान आने के बाद सभी लोगों की निगाहें मुस्लिम पक्षकारों विशेषकर सुन्नी वक्फ बोर्ड के फैसले की ओर लगी हुई थीं। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अपनी बात पर कायम रहते हुए अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 6-1 से स्वीकार कर लिया है और कहा कि अब वह फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगा, लेकिन अभी आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के जफरयाब जिलानी अपनी याचिका दायर करने पर जोर दे रहे हैं। अब यह तय है कि मुस्लिम समाज इस मामले में पूरी तरह से विभाजित हो चुका है।
आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य और बाबरी मस्जिद एक्श्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी अभी भी पुनर्विचार याचिका दायर करने की बात कर रहे हैं। जिससे साफ पता चल रहा है कि वह केवल अब वकालत की जो दुकान बंदी के कगार पर पहुंच चुकी है। उसको औवेसी जैसे कट्टरपंथी संासद अपनी राजनीति को चमकाने के लिए एक बार फिर भड़का रहे हैं और जो लोग सुप्रंीम कोर्ट का फैसला आने के पहले तक यह कह रहे थे कि हम लोग कोर्ट का जो भी फैसला आयेगा उसका सम्मान करेंगे, अब बेनकाब हो चुके हैं। लेकिन अब यह देश चंद लोगों की साजिशों को मुहतोड़़ जवाब दे रहा है। जो लोग पुनर्विचार याचिका के माध्यम से देश का वातावरण एक बार फिर खराब करने की साजिश रच रहे हैं, ऐसे तत्वों को किसी भी हालत में सफल नहीं होने दिया जायेगा। अब अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनकर रहेगा और उसे दुनिया की कोई भी ताकत, साजिश या पुनर्विचार याचिका रोक नहीं पायेगी।
— मृत्युंजय दीक्षित