जानवर कौन ?

वह एक पशु चिकित्सक थी ! पशुओं के प्रति प्रेम और करुणा ने उसे पशु चिकित्सक का कैरियर अपनाने के लिए प्रेरित किया था । वह अक्सर राह चलते हुए किसी भी घायल जानवर की मरहम पट्टी और दवाई कर देती थी । इससे मिलनेवाले आत्मिक खुशी की चाह में उसे अपने आर्थिक नुकसान की भी परवाह नहीं थी ।
उस दिन भी हमेशा की तरह रात 8 बजे वह दवाखाना बंद करके अपनी स्कूटी से घर के लिए रवाना हुई । अचानक एक जगह स्कूटी का टायर पंचर हो गया । सुनसान जगह और घर अभी दूर था तभी उसे कुछ आगे खड़े ट्रक के पास से दो लोग आते दिखे । उन लोगों ने उसकी मदद की पेशकश की । उनसे बात करते हुए उसकी नजर एक आवारा कुत्ते पर पड़ी जो उसकी तरफ ही आ रहा था । वह उन इंसानों से बात कर रही थी लेकिन उसकी नजर उस कुत्ते पर थी जिसे उसने पहचान लिया था । कुछ दिन पहले उसने इस घायल कुत्ते की मरहम पट्टी की थी जो उसकी तरफ बढ़ते हुए अपनी पूँछ हिलाकर उसके प्रति अपनी खुशी और कृतज्ञता प्रकट कर रहा था । अभी वह कुत्ता उनसे कुछ दूरी पर ही था कि सुनसान देख उन दो इंसानों ने उस असहाय अबला पे जोर आजमाना शुरू कर दिया । वह कुत्ता अचानक झपट पड़ा अपने मददकर्ता की मदद करने के लिए , एक आदमी की टांग को उसने अपने मजबूत जबड़े में दबोच लिया लेकिन कुत्ता इंसान का कब तक मुकाबला करता ? दूसरे ने अपने हाथ में पकड़े डंडे का एक सटीक प्रहार उस कुत्ते के सिर पर किया । अपने चारों पैर फैला कर वह कुत्ता वहीं जमीन पर पसर गया । मर्मांतक पीड़ा के साथ ही अश्रु उसकी आँखों से छलक पड़े । वह बेबसी से उन दोनों इंसानों को देख रहा था और इससे पहले कि वो दोनों नराधम अपने मकसद में कामयाब होते उस कुत्ते की आँखें स्वतः ही बंद हो गईं । शायद उसकी आत्मा ने अपने मददकर्ता का वह भयानक अंजाम देखना गवारा नहीं किया था और कुछ देर बाद दोनों इंसानी भेड़िए कहकहे लगाते हुए उस डॉक्टर के जिस्म को नोंचते हुए अपनी जीत का जश्न मना रहे थे ।

परिचय - राजकुमार कांदु

मुंबई के नजदीक मेरी रिहाइश । लेखन मेरे अंतर्मन की फरमाइश ।