कविता

कविता

कब तक शर्मिदंगी
का चलता रहेगा
यूँ बेहयाई का नाच
और लुटती रहेगी
अज़मत बेटियों की
क्यों कांपती नहीं
रूह इन बुज़दिल
इंसानों की
जो पल भर की
वासना के मद में
करते हैं बार बार
ये गुनाह
क्यों कांपती नहीं
रूह इनकी
क्यों कांपते नहीं
हाथ इनके
करने को ये घोर पाप
कब तक चलता रहेगा
ये सिलसिला
इस देश में जहाँ
कुछ दिन होता
होहल्ला इतना
मीडिया में
या मोमबत्ती जलाकर
प्रदर्शन
फिर वही शांति
जब तक कोई
अगली महिला बच्ची
न बने शिकार
क्यों नहीं बनता कानून
कोई ऐसा
जिस से दस बार सोचे
ये पापी छूने को भी
काट तो इनके अंग
जिस से खेलते
ये वासना का खेल बेखौफ
या दे दो सज़ा मौत की
तभी शायद थम पाए
ये पीड़ा
ये वेदना
ये घटनाएं
जो सहती बेकसूर
बच्चियां और बहनें हमारी
न बने फिर कोई
शिकार
इस से पहले कड़े करो
कुछ यत्न
नहीं चाहिए बस दो आँसू
या संवदेना
हो इस घिनोने अपराध
की सज़ा कोई कड़ी
ताकि फिर न लूट
पाए अज़मत कोई
किसी भी मासूम की।।
— मीनाक्षी सुकुमारन

परिचय - मीनाक्षी सुकुमारन

नाम : श्रीमती मीनाक्षी सुकुमारन जन्मतिथि : 18 सितंबर पता : डी 214 रेल नगर प्लाट न . 1 सेक्टर 50 नॉएडा ( यू.पी) शिक्षा : एम ए ( अंग्रेज़ी) & एम ए (हिन्दी) मेरे बारे में : मुझे कविता लिखना व् पुराने गीत ,ग़ज़ल सुनना बेहद पसंद है | विभिन्न अख़बारों में व् विशेष रूप से राष्टीय सहारा ,sunday मेल में निरंतर लेख, साक्षात्कार आदि समय समय पर प्रकशित होते रहे हैं और आकाशवाणी (युववाणी ) पर भी सक्रिय रूप से अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत करते रहे हैं | हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रहों .....”अपने - अपने सपने , “अपना – अपना आसमान “ “अपनी –अपनी धरती “ व् “ निर्झरिका “ में कवितायेँ प्रकाशित | अखण्ड भारत पत्रिका : रानी लक्ष्मीबाई विशेषांक में भी कविता प्रकाशित

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