कविता

कविता – क्या लिखूँ ?

रोज काल का ग्रास बन रही आसिफा,
फिर कैसे मैं श्रृंगार लिखूँगा ।
देश चल रहा नफरत से ही,
फिर कैसे मैं प्यार लिखूँगा ।
वंचित हैं जो अधिकार से अपने,
उनका मैं अधिकार लिखूँगा ।
दुष्टों को मारा जाता है जिससे,
अब मैं वही हथियार लिखूँगा ।
रोज जवान मर रहे सीमा पर,
कब तक मैं उनकी बली सहूँगा ।
मर रही जनता रोज देश की,
कब तक मैं ये अत्याचार सहूँगा ।
आसिफा, ट्विंकल ना जाने कौन-कौन ?
अब इनकी चित्कार लिखूँगा ।
हाँ, देश चल रहा नफरत से ही
फिर कैसे मैं प्यार लिखूँगा ।
— सौरभ कुमार ठाकुर 

सौरभ कुमार ठाकुर

बाल कवि & लेखक ग्राम- रतनपुरा, डाकघर-गिद्धा, थाना-सरैया, जिला-मुजफ्फरपुर, राज्य-बिहार, पिन कोड- 843106, देश-भारत मो0- 8800416537