पुस्तक समीक्षा

समीक्षा-कहानियां सुनाती दादाजी की चौपाल

समीक्षा-कहानियां सुनाती दादाजी की चौपाल

 

पुस्तक: दादाजी की चौपाल (कहानी संग्रह)

रचनाकार: ललित शौर्य

संस्करण: 2019

मूल्य: 160 रुपए

प्रकाशक: उत्कर्ष प्रकाशन,

142, शाक्यपुरी, कंकरखेड़ा मेरठ (उप्र)

मोबाइल नंबर 7351467702

समीक्षक-ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ 9424079675

 

कहानियां सभी को अच्छी लगती है। दादी सुनाती है तो ओर भी लुभाती है । बोर हुई तो बच्चों को सुलाती है । मगर, कहानियाँ भाती और लुभाती सभी को है। कारण, इन में सरलता, रोचकता और सरसता कूट-कूट कर भरी होती है।

‘दादाजी की चौपाल’- ऐसी ही कहानियों का अनमोल खजाना है । इस पुस्तक में 19 कहानियां संग्रहित है। जिस के कहानीकार ललित शौर्य स्वयं एक रोचक, प्रेरक और बालसुलभ जिज्ञासाओं से परिपूर्ण व्यक्तित्व के स्वामी हैं। पेशे से इंजिनियर कहानीकार की इस प्रवृतियों को इन कहानियों में महसूस किया जा सकता हैं।

संग्रह की पहली आमुख कहानी -‘दादाजी की चौपाल’ सीधी, सरल और सहज भाषा में लिखी गई कहानी है. यह कहानी दादाजी के माध्यम से सरस, सरल और प्रभावोत्पादक रूप से उन की उपयोगिता सिद्ध करती है. यह कहानी बच्चों को एक महत्वपूर्ण संदेश भी देती है।

‘हनी बी की होशियारी’- कहानी बच्चों में होशियारी को प्रतिपादित करने में सफल रही है । वही ‘मौहल्ले की बैशाखी’- बच्चों को अपनी प्रकृति के अनुसार अमूल्य निधि को सहेजने की सीख देती है।

‘मैं भी फौजी बनूंगा’, ‘ हैप्पी मदर्स डे’, ‘ सकारात्मक सोच का जादू’, ‘ किट्टू कबूतर की होशियारी’, ‘ साधु महाराज की सीख’, ‘ सफलता के सूत्र’ और ‘ दादाजी की सीख’ कहानियां अपने शीर्षक को सार्थक करते हुए बच्चों को बहुत कुछ सीख देती है. ये कहानियों बच्चों में किसी न किसी उद्देश्य की पूर्ति करते हुए भाव,  भाषा,  शैली और कथ्य की दृष्टि से बेहतरीन बन पड़ी है ।

वही ‘जंगल पार्टी’, ‘ कन्नू और कक्कू’, ‘पृथ्वी के रक्षक’, अप्रैल फूल डे पर सबक’,  ‘प्रियांशी को बुखार’, ‘फास्टफूड का कीड़ा’, ‘धरती रही पुकार’, आदि कहानियां बच्चों को कार्यकुशलता से कार्य करने, व्यवहार में कुशलता लाने के साथसाथ कई उद्देश्य की पूति करते हुए बच्चों को अच्छा संदेश देती है।

कुल मिलाकर सभी कहानियां बच्चों के भाव और उन की अपेक्षाओं के अनुरूप बेहतरीन व सारगर्भित है । प्रगतिशील शैली में लिखी गई कहानियाँ उपयोगिता,  रोचकता,  सरलता,  सहजता व नवीनता समेटे हुए हैं ।

 

आकर्षक साज-सज्जा व त्रुटिहीन मुद्रण ने पुस्तक की उपादेयता में वृद्धि की है । सुंदर व आकर्षक रेखाचित्र के साथ सुंदर छपाई, सफेद कागज व आकर्षक मुखपृष्ठ के साथ बच्चों के लिए बहुत सुंदर कृति प्रकाशित की गई है। आधुनिक रूप से अंग्रेजी मिश्रित हिंदी में लिखित कहानी आजकल के बच्चों की भाषानुकुल कथ्य को प्रस्तुत करती हैं ।

58 पृष्ठों की संपूर्ण रंगीन पृष्ठों की पुस्तक का मूल्य ₹160 रचनाओं और पुस्तक की गुणवत्ता के हिसाब से वाजिब है। इस पुस्तक को अपने बच्चों के स्वस्थ मनोरंजन, बेहतर भावी नागरिक गुणों के विकास, आनंद और पाठ्यगतिविधि की वृद्धि के लिए बच्चों को खरीद कर देना चाहिए। इस पुस्तक को बच्चे अवश्य पसंद करेंगे ।

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दिनांक 04-12-2019

ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ,

पोस्ट ऑफिस के पास, रतनगढ़

जिला -नीमच (मध्यप्रदेश)

पिनकोड- 458226

9424079675

परिचय - ओमप्रकाश क्षत्रिय "प्रकाश"

नाम- ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ जन्म- 26 जनवरी’ 1965 पेशा- सहायक शिक्षक शौक- अध्ययन, अध्यापन एवं लेखन लेखनविधा- मुख्यतः लेख, बालकहानी एवं कविता के साथ-साथ लघुकथाएं. शिक्षा- एमए (हिन्दी, अर्थशास्त्र, राजनीति, समाजशास्त्र, इतिहास) पत्रकारिता, लेखरचना, कहानीकला, कंप्युटर आदि में डिप्लोमा. समावेशित शिक्षा पाठ्यक्रम में 74 प्रतिशत अंक के साथ अपने बैच में प्रथम. रचना प्रकाशन- सरिता, मुक्ता, चंपक, नंदन, बालभारती, गृहशोभा, मेरी सहेली, गृहलक्ष्मी, जाह्नवी, नईदुनिया, राजस्थान पत्रिका, चैथासंसार, शुभतारिका सहित अनेक पत्रपत्रिकाआंे में रचनाएं प्रकाशित. विशेष लेखन- चंपक में बालकहानी व सरससलिस सहित अन्य पत्रिकाओं में सेक्स लेख. प्रकाशन- लेखकोपयोगी सूत्र एवं 100 पत्रपत्रिकाओं का द्वितीय संस्करण प्रकाशनाधीन, लघुत्तम संग्रह, दादाजी औ’ दादाजी, प्रकाशन का सुगम मार्गः फीचर सेवा आदि का लेखन. पुरस्कार- साहित्यिक मधुशाला द्वारा हाइकु, हाइगा व बालकविता में प्रथम (प्रमाणपत्र प्राप्त). मराठी में अनुदित और प्रकाशित पुस्तकें-१- कुंए को बुखार २-आसमानी आफत ३-कांव-कांव का भूत ४- कौन सा रंग अच्छा है ? संपर्क- पोस्ट आॅफिॅस के पास, रतनगढ़, जिला-नीमच (मप्र) संपर्कसूत्र- 09424079675 ई-मेल opkshatriya@gmail.com

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