कविता

नया साल

अच्छे दिन की आस में उन्नीस गुजर गया।
दोस्तों फिर से संभलने का वक़्त आ गया।।
मायूस देखा है आदमी को प्याज के लिए।
भाव बढ़ते बढ़ते प्याज कहाँ से कहाँ आ गया।।
रात भर जी एस टी ने सोने नहीं दिया आदमी को।
नये सामान खरीदने का लो वक़्त आ गया।।
पुराने नोट सा मन हो गया आदमी का दोस्तों।
अब नये नोट जैसा बदलने का वक्त आ गया।।
नया भारत बनेगा बुलेट ट्रेन चलेगी देश में।
कलाम के सपनों का भारत बनाने का वक़्त आ गया।।
गांधी की अहिंसा का पाठ फिर पढ़ने की जरूरत है।
देश मे हिंसक घटनाओं को रोकने का वक़्त आ गया।।
राम मन्दिर भी बनेगा लेकिन राम कौन बनेगा ।
सत्य के लिए असत्य से लड़ने का वक़्त आ गया।।
मासूमों के साथ जो करते हैं अत्याचार दोस्तों।
उन्हें फाँसी पर लटकाने का वक्त आ गया।।
देश मे संस्कार सभ्यता जीवित कैसे रहे।
मानवीय मूल्यों की स्थापना का फिर वक़्त आ गया।।
— कवि राजेश पुरोहित

परिचय - राजेश पुरोहित

पिता का नाम - शिवनारायण शर्मा माता का नाम - चंद्रकला शर्मा जीवन संगिनी - अनिता शर्मा जन्म तिथि - 5 सितम्बर 1970 शिक्षा - एम ए हिंदी सम्प्रति अध्यापक रा उ मा वि सुलिया प्रकाशित कृतियां 1. आशीर्वाद 2. अभिलाषा 3. काव्यधारा सम्पादित काव्य संकलन राष्ट्रीय स्तर की पत्र पत्रिकाओं में सतत लेखन प्रकाशन सम्मान - 4 दर्ज़न से अधिक साहित्यिक सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित अन्य रुचि - शाकाहार जीवदया नशामुक्ति हेतु प्रचार प्रसार पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य किया संपर्क:- 98 पुरोहित कुटी श्रीराम कॉलोनी भवानीमंडी जिला झालावाड़ राजस्थान पिन 326502 मोबाइल 7073318074 Email 123rkpurohit@gmail.com

Leave a Reply