कविता

नव वर्ष मुबारक हो !!!!

1.कामयाबी की दुआ

जैसे, जिस हाल में उसने रखा है,
खुश रहने की कोशिश करता हूं,
धीरे-धीरे ही सही
आगे बढ़ते रहने की कोशिश करता हूं,
जो जिस स्वभाव का है,
उसे वैसा ही स्वीकारने की कोशिश करता हूं,
नए साल में सबको मिलें खुशियां अपार,
सबके लिए कामयाबी की दुआ करता हूं.

परिचय - गुरमेल सिंह भमरा लंदन

१९६२ में बीए फाइनल की पढ़ाई छोड़ कर इंग्लैण्ड चले गए. लन्दन में निवास कर रहे हैं. किताबें पढने और कुछ लिखने का शौक बचपन से ही रहा है। पिछले १३ वर्ष से रिटायर हैं और बोलने में कठिनाई की समस्या से पीड़ित हैं. पांच वर्ष से रेडिओ एक्सेल बर्मिंघम को कहानियाँ भेज रहे हैं. 'जय विजय' के लिए लघु कथाएँ लिखते हैं. संस्मरण लिख रहे हैं.

One thought on “नव वर्ष मुबारक हो !!!!

  1. प्रिय गुरमैल भाई जी, नए साल की छोटी-सी, प्यारी-सी आपकी कविता बहुत अच्छी लगी. मेहनत हो, लगन हो और कामयाबी की दुआ भी मिल जाए, तो फिर शिखर तक पहुंचने में तनिक भी देर नहीं लगती. आपको नए वर्ष की हार्दिक बधाइयां व शुभकामनाएं. सटीक व सार्थक रचना के लिए बधाई व आभार.

Leave a Reply