हास्य व्यंग्य

व्यंग्य- सोशल मीडिया पर समाज सेवा

वो एक समाजसेवी थे, समाजसेवी के साथ पशु प्रेमी भी जुड़ा है, उनका समाजसेवा बड़े-बड़े बैनर पोस्टर और समाचार के हेडलाइंस पर होते थे। टीवी डिबेट वाले अक्सर उन्हें बैठाकर सामाजिक मुद्दे पर चर्चा करवाते हैं। दिल्ली के बड़े-बड़े पार्टी में उन्हें अक्सर देखा जा सकता, उनका अच्छे-अच्छे लोगों से पहुंच था, शहर में करोड़ों की प्रापर्टी दबाकर रखा है। उस समय मैं अपनी पढ़ाई पूरी कर रहा था मेरे एक मित्र ने बताया कि उनका परिचय मिस्टर अशोक से है। “अरे वही अशोक ना जो हमेशा टीवी पर दिखते शायद टीवी उनका घर ही, वहीं पर रहते हैं।
उनसे मिलने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ। मेरे मित्र ने परिचय करवाते हुए बताया “यह महाशय पढ़ाई कर रहे और उसके साथ में लेखक भी हैं। आप अपने बारे में कुछ बता दीजिए ताकि कुछ अच्छा लिख सकें। समाजसेवी जी बोले” जी हां आपको क्या बताएं। मैं हाथ जोड़कर बोला” अरे आपका दर्शन हो गया मैं धन्य हो गया आप जैसे महापुरुष से मिलकर, उन्होंने अपनी जिंदगी का कथा सुनाना आरंभ कर दिया।
उनके पिताजी एक नेता के सेक्रेटरी हुआ करते पिताजी माताजी को रोज-रोज लूटपाट, भ्रष्टाचार और मिलावट खोरी का  कहानी सुनाते थे, उस वक्त मैं मां के गर्भ में था मैंने निश्चित कर लिया कि मैं समाज की व्याप्त गंदगी को दूर करूंगा। मैं उसी वक्त ठान लिया कि मैं समाजसेवी बनूंगा,
फिर बचपन में किताब से दोस्ती करके मैं उन्हीं के साथ खेलता था। मेरे पिताजी बहुत हैरान हो गए उन्होंने मुझे बहुत सारे ज्योतिष, बाबाओं के पास ले गए मगर किस्मत को कौन टाल सकता था । 12वीं में दो बार फेल हो जाने पर पिताजी ने घर से भगा दिया, जिंदगी में बहुत सारी दुख: देख चुका हूं। अजी लुधियाना में जूता तक पॉलिश किया हूं।
बहुत सारी तकलीफ उठाना पड़ा संघर्ष की बदौलत आज इस ऊंचाई तक पहुंचा हूं। समाजसेवी बन गया पशु प्रेमी भी बन गया देश में कहीं पशुओं पर अत्याचार होता तो मैं उस पर जरूर आवाज उठाता हूं। आपने पढ़ा जरूर होगा पिछले महीने मेरा कई लेख और इंटरव्यू अखबारों में छपा था। मैंने नशा मुक्ति पर भी एक अभियान चलाया, अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है कई महान हस्तियों ने समर्थन दिया। अरे भाई बहुत गलत बात है जब युवा वर्ग नशा करेगा तो देश का भविष्य कैसे बदलेगा  देश ऊंचाइयों पर कैसे जाएगा।
फिर उन्होंने सिगरेट को निकाला मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा” जनाब सिगरेट पीते हो। मैंने मना कर दिया उन्होंने सिगरेट पीकर बहुत सारी बातें बताई किस तरह पशुओं के लिए उन्होंने तस्करों से कई बार लोहा लिया, धरना प्रदर्शन किया सरकार से आंख से आंख मिलाकर संघर्ष किया।
आज सोशल मीडिया पर हमेशा सक्रिय रहता हूं, लाखों मेरे फॉलोवर फैंस है।
मैं हंसकर बोला “बस करो साहब रहने दो इतने कहानी में दो उपन्यास प्रकाशित हो सकते हैं।” हम लोग उठकर चलने की तैयारी में थे कि
समाजसेवी जी बोल उठे “मुन्ना तुम्हारी चाची ने आज देसी मुर्गा पकाया है खाकर जाना।”
— अभिषेक राज शर्मा

परिचय - अभिषेक शर्मा

कवि अभिषेक राज शर्मा जौनपुर (उप्र०) मो. 8115130965 ईमेल as223107@gmail.com indabhi22@gmail.com

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