लघुकथा

नई आस

‘‘ऑस्ट्रेलिया के झाड़ीनुमा जंगलों में पिछले साल सितंबर से आग लगी है. करीब 63000 वर्ग किमी जमीन का पूरा पारिस्थितिक तंत्र जलकर तबाह हो गया है. ऑस्ट्रेलिया में आग से अब तक 28 लोगों की जान चली गई है. दो हजार से ज्यादा घर जलकर खाक हो गए हैं.” एक रिपोर्ट.

”तो क्या सब कुछ खत्म हो गया है?”

”नहीं, कुदरत ने अपना मेक ओवर का काम शुरू कर दिया है. जले हुए पौधों के तनों और जड़ों से नई हरी पत्तियां वाले डंठल निकल रहे हैं. उनका रंग गुलाबी जैसा है. जमीन में कई छोटे पौधे उगने लगे हैं.” ”मरे लोबे न्यू साउथ वेल्स के सेंट्रल कॉस्ट स्थित कुलनुरा में अपने घर की हालत देखने गए थे, यहां दिसंबर महीने में आग फैली थी. उन्होंने देखा.

ऑस्ट्रेलिया के एक फोटोग्राफर मरे लोबे ने प्रकृति के मेकओवर की कई फोटो कैद कीं, जिन्हें सोशल मीडिया पर लोग नई आस की तरह देख रहे हैं.

सच में बहुत भयावह दृश्य है. सभी जानवरों को जान बचाते भागते देखा जा रहा है. हम खुद एक बैग में पासपोर्ट और पैसे डालकर तैयार बैठे हैं, कभी भी आग इस तरफ आ सकती है, शुक्र है थोड़ी बरसात आ गई है और नई आस बंधी है.

यह नई आस ही तो जीवन है. सभी लोग अपनी-अपनी तरह से सहयोग दे रहे हैं. सभी लोग और सरकार तन-मन-धन से सहयोग दे रहे हैं. फोटोग्राफर फोटोज़ खींचकर लोगों को आस बंधा रहे हैं, हमारे छोटे पोते ऑनिश ने बुशफायर पर खुद गीत लिखा-धुन-बनाई-गाया-वीडियो बनाया और लोगों को सहयोग करने के लिए प्रेरित किया.

नई आस जगाने के लिए ही आग से घिरे राज्य में होगा ऑस्ट्रेलियन ओपन, सुरक्षा के लिए मौसम वैज्ञानिक और एक्सपर्ट मौजूद रहेंगे.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

5 thoughts on “नई आस

  1. बहुत ही सुंदर वर्णन किया है . असल में कुदरत ही हमारी माँ है जो प्राण हरती है तो प्राण को नया जीवन भी देती है . हमने अपने संस्कृति से प्रकृति के जुड़ाव को ही ख़त्म कर दिया है .. प्रकुति से दूर होने से ही विकृति घेर रही है आज के मानव को |

    1. प्रिय महेश भाई जी, रचना पसंद करने, सार्थक व प्रोत्साहक प्रतिक्रिया करके उत्साहवर्द्धन के लिए आपका हार्दिक अभिनंदन. आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर हमारे मन में नई आस जगी है, कि जय विजय में भी कोई किसी की रचना पढ़ता है और प्रतिक्रिया देता है. प्रतिक्रिया से लेखक को पाठकों के मनोभावों का परिचय मिलता है और तदनुसार लेखक अपने लेखन में सुधार भी ला सकता है. बहरहाल, हम आपकी शानदार-जानदार प्रतिक्रिया अपने लघुकथा मंच पर अंकित कर रहे हैं. आज के ब्लॉग ‘यादों के झरोखे से-13’ में हम अपने ब्लॉग की वेबसाइट लिख रहे हैं, अगर आप अपनी यह प्रतिक्रिया वहां भी दे सकें, तो बहुत अच्छा होगा. ब्लॉग का संज्ञान लेने, इतने त्वरित, सार्थक व हार्दिक कामेंट के लिए हृदय से शुक्रिया धन्यवाद.

  2. यह बहुत अछि बात है लीला बहन .मैंने भी बीबीसी पर देखा है और देख कर मन पर्सन हो गिया की कुदरत की लीला का कमाल है की नई आस की किरने आने लगी हैं .

    1. प्रिय गुरमैल भाई जी, रचना पसंद करने, सार्थक व प्रोत्साहक प्रतिक्रिया करके उत्साहवर्द्धन के लिए आपका हार्दिक अभिनंदन. कुदरत की लीला का कमाल है कि नई आस की किरणें आने लगी हैं, नई आस जगाने लगी हैं. ब्लॉग का संज्ञान लेने, इतने त्वरित, सार्थक व हार्दिक कामेंट के लिए हृदय से शुक्रिया धन्यवाद.

  3. यह नई आस ही तो जीवन है. सभी लोग अपनी-अपनी तरह से सहयोग दे रहे हैं. सभी लोग और सरकार तन-मन-धन से सहयोग दे रहे हैं. फोटोग्राफर फोतोज़ खींचकर लोगों को आस बंधा रहे हैं, हमारे छोटे पोते ऑनिश ने बुशफायर पर खुद गीत लिखा-धुन-बनाई-गाया-वीडियो बनाया और लोगों को सहयोग करने के लिए प्रेरित किया.

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