गीत/नवगीत

गीत

कट रहें हैं पेड़ देखो, ताल में घर बन रहे हैं ,
बन रहे हैं कंकरीटों के शहर, अब गाँव सारे,
ऐ प्रवासी पक्षियों अब तुम न आना !

जहर पीती हर नदी,और झील के सिमटे किनारे।
अब कहाँ चकवी निशा में,मीत को अपने पुकारे ?
कहाँ कोई क्रौंच विरहा में अकेला मर मिटेगा ?
उस विरह की पीर ,कवि, कविता में फिर कैसे उतारे?

कवि उजड़ती श्यामला को कब तलक बेवश निहारे?
ऐ प्रवासी पक्षियों……………………………

कोयलों बोलो कहाँ वो आम के उपवन गये ?
पक्षियों के गीत गुंजन कहाँ वो मधुवन गये ?
कहाँ पीपल और पाकड़ कहाँ बरगद खो गये,
कहाँ गौरैया ,शरद के कहाँ वो खंजन गये ?

किसलिए स्वाती बुलाऊँ? बस यही,चातक विचारे।
ऐ प्रवासी पक्षियो…………………………..

हर जगह फसलें जहर की बो रहा है आदमी ।
पाप ,भू,वायू में ,जल में धो रहा है आदमी ।
उगाता है बोनसाई, ,जंगलों को काटकर,
खुद को खा करके,मगर सा रो रहा है आदमी ।

बरगदों को काट कर,गमलों में बरगद मत उगा रे!
ऐ प्रवासी पक्षियों …………………………….

————————-©डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी , ,गोरखपुर

परिचय - डॉ दिवाकर दत्त त्रिपाठी

नाम डॉ दिवाकर दत्त त्रिपाठी आत्मज श्रीमती पूनम देवी तथा श्री सन्तोषी . लाल त्रिपाठी जन्मतिथि १६ जनवरी १९९१ जन्म स्थान हेमनापुर मरवट, बहराइच ,उ.प्र. शिक्षा. एम.बी.बी.एस. पता. रूम न. ,१७१/१ बालक छात्रावास मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद ,उ.प्र. प्रकाशित पुस्तक - तन्हाई (रुबाई संग्रह) उपाधियाँ एवं सम्मान - साहित्य भूषण (साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगम अकादमी ,परियावाँ, प्रतापगढ़ ,उ. प्र.) शब्द श्री (शिव संकल्प साहित्य परिषद ,होशंगाबाद ,म.प्र.) श्री गुगनराम सिहाग स्मृति साहित्य सम्मान, भिवानी ,हरियाणा अगीत युवा स्वर सम्मान २०१४ अ.भा. अगीत परिषद ,लखनऊ पंडित राम नारायण त्रिपाठी पर्यटक स्मृति नवोदित साहित्यकार सम्मान २०१५, अ.भा.नवोदित साहित्यकार परिषद ,लखनऊ इसके अतिरिक्त अन्य साहित्यिक ,शैक्षणिक ,संस्थानों द्वारा समय समय पर सम्मान । पत्र पत्रिकाओं में निरंतर लेखन तथा काव्य गोष्ठियों एवं कवि सम्मेलनों मे निरंतर काव्यपाठ ।

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