गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हौसला हो पास जिसके, पंख की जरुरत नही,
प्रीत का विश्वास संग हो, साथ की जरुरत नही|
आस्था ने सदा जिसे, जीने का संबल दिया हो,
हर दिवस खुशियाँ मिलें, मधुमास की जरुरत नही|
दिल मिले न कभी, ख्याल भी हों जुदा जुदा,
साथ फिर भी चल रहे, अलगाव की जरुरत नही|
एक हो मंजिल अगर, मुसाफिर हों अलग अलग,
अजनबी अपने से लगें, अपनो की जरुरत नही|
हो दिवाना इश्क में, ख्यालों में खोया हुआ,
भीड में रहकर भी तन्हां, तन्हाई की जरूरत नही।
आस्था और विश्वास का, हो मधुर मिलन जहाँ,
हो गया सब खुद समर्पित, समर्पण की जरूरत नही।

— डॉ अ कीर्तिवर्धन

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