गीतिका/ग़ज़ल

सर पटकने से पत्थर पिघलता नहीं

सर पटकने से पत्थर पिघलता नहीं।
लिखा किस्मत का टाले से टलता नहीं।।

लग गया हो अगर इश्क का रोग तो,
लाख कर लो दवा दिल बहलता नहीं।

तार दिल के किसी से जुड़े हैं जरूर,
वर्ना दिल यूँ अचानक धड़कता नहीं।

दिल जला है किसी का करो अब पता,
धुआं यूँ ही फिजाओं में उठता नहीं।

बड़ा मुश्किल है रंगना सभी को यहाँ,
रंग गहरे पर रंग कोई चढ़ता नहीं।

डालती है किरण शब्दों में आत्मा ,
गीत यूँ ही दिलों तक पहुँचता नहीं।

परिचय - किरण सिंह

पिता का नाम - स्व० श्री कुन्ज विहारी सिंह (एडवोकेट ) बलिया पति का नाम - श्री भोला नाथ सिंह ( कार्यपालक विद्युत अभियन्ता बिहार राज्य विद्युत बोर्ड ) निवास स्थान - पटना जन्म स्थल - ग्राम मझौआं जिला बलिया साहित्य , संगीत और कला की तरफ बचपन से ही रुझान रहा है ! याद है वो क्षण जब मेरे पिता ने मुझे डायरी दिया.था ! तब मैं कलम से कितनी ही बार लिख लिख कर काटती.. फिर लिखती फिर......... ! जब पहली बार मेरे स्कूल के पत्रिका में मेरी कविता छपी उस समय मुझे जो खुशी मिली थी उसका वर्णन मैं शब्दों में नहीं कर सकती ....! मेरा विवाह १८ वर्ष की उम्र जब मैं बी ए के द्वितीय वर्ष में प्रवेश ही की थी कि १७ जून १९८५ में मेरा विवाह सम्पन्न हो गया ! २८ मार्च १९८८ में मुझे प्रथम पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई तथा २४ मार्च १९९४ में मुझे द्वितीय पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई..! घर परिवार बच्चों की परवरिश और पढाई लिखाई मेरी पहली प्रार्थमिकता रही ! किन्तु मेरी आत्मा जब जब सामाजिक कुरीतियाँ , भ्रष्टाचार , दबे और कुचले लोगों के साथ अत्याचार देखती तो मुझे बार बार पुकारती रहती थी कि सिर्फ घर परिवार तक ही तुम्हारा दायित्व सीमित नहीं है .......समाज के लिए भी कुछ करो .....निकलो घर की चौकठ से....! तभी मैं फेसबुक से जुड़ गई.. फेसबुक मित्रों द्वारा मेरी अभिव्यक्तियों को सराहना मिली और मेरा सोया हुआ कवि मन फिर से जाग उठा .....फिर करने लगी मैं भावों की अभिव्यक्ति..! और मैं चल पड़ी इस डगर पर ... छपने लगीं कई पत्र पत्रिकाओं में मेरी अभिव्यक्तियाँ ..! प्रकाशित पुस्तकें - मुखरित संवेदनाएँ ( एकल काव्य संग्रह ) प्रीत की पाती (एकल काव्य संग्रह) अन्तः के स्वर (दोहा संग्रह) प्रेम और इज्जत (कथा संग्रह संयुक्त काव्य संग्रह - काव्य सुगंध भाग २ , भाषा सहोदरी भाग 2 , कविता अनवरत , सत्यम् प्रभात , शब्दों के रंग !

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