बाल कविता शिशुगीत

जय भारत मैं गाऊं

मन करता है जय भारत, जय-जय भारत मैं गाऊं,
जय भारत, जय भारत गा, गणतंत्र दिवस मैं मनाऊं.
उठते-बैठते, सोते-जागते जय भारत मैं गाऊं,
चलते-फिरते, दौड़ते-भागते जय भारत मैं गाऊं.
गंगा-सा पावन मन लेकर, काम सभी के आऊं,
हिमगिरि-सा हो अटल इरादा, देश का मान बढ़ाऊं.
बादल से सीखूं मैं उड़ना, पंछी जैसे गाऊं,
फूलों से सीखूं मैं महकना, अग जग को महकाऊं.
देश बढ़े विकास के पथ पर, मैं भी हाथ बंटाऊं,
जहां-जिधर जाना हो मेरा, भारत-पूत कहाऊं.
आनंद का सागर बन लहरूं, तिरंगा मैं लहराऊं,
जय भारत, जय भारत गा, गणतंत्र दिवस मैं मनाऊं.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “जय भारत मैं गाऊं

  1. यह बालगीत छोटे बच्चों के लिए लिखा गया है. वे अपने स्कूल या कॉलोनी के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी इसे प्रस्तुत कर सकते हैं.

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