कविता

गणतंत्र मुबारक

द्रोही को ‘गनतंत्र’ मुबारक,
पंडित जी को मंत्र मुबारक,
देशभक्त जितने भारत के-
उन सबको ‘गणतंत्र’ मुबारक।

वंशवाद के हर चमचे को,
दिल बैठा ‘परतंत्र’ मुबारक।
नवल सृजन के वैज्ञानिक को-
दूर करे दुख ‘यंत्र’ मुबारक।

जो विकास की लहर चला दे,
मोदी को वह तंत्र मुबारक।
जो ‘सीएए’ के अवरोधी-
दुश्मन का ‘अभिमंत्र’ मुबारक।

आजादी के नारे वालों,
मन से रहो ‘स्वतंत्र’ मुबारक।
राहुल, माया,कजरी, ममता-
सबको इनका तंत्र मुबारक।

भारत माता की जय बोलो,
दिल से जन्म भूमि के हो लो,
जिन्हें देश से प्यार नहीं है-
उन्हें पाक षडयंत्र मुबारक ।।

— सुरेश मिश्र

परिचय - सुरेश मिश्र

हास्य कवि

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