लघुकथा

हम सब साथ-साथ जो हैं!

”अगर मैं सूइसाइड करता हूं, तो इस अपराध की क्या सजा होगी.” समीर ने यह ट्विट देखा, जो नीलेश बेडेकर ने अपने ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया था.

”कौन है यह नीलेश! क्यों आमादा है सूइसाइड करने को! क्या आदमी की जान इतनी सस्ती है!” ऐसे ही अनेक प्रश्न समीर के अंतर्मन को झिंझोड़ गए.

”उसमें अभी आत्महत्या करने की हिम्मत नहीं है, इसलिए मुंबई पुलिस की सोशल मीडिया पर ऐसा प्रश्न कर रहा है. इस कमजोर दिल आदमी को बचाना ही होगा.” उसने नीलेश बेडेकर के अपने ट्विटर हैंडल को खंगाला और उसका फोन नं. ढूंढ निकाला और मोबाइल नंबर से पुलिस ने नीलेश का लोकेशन ट्रेस कर लिया. तुरंत उसने कार्रवाई की.

पुलिस की एक टीम के लोग नीलेश बेडेकर को कॉल कर उसका ध्यान भटकाने की कोशिश करते रहे, जबकि दूसरी टीम उस जगह के लिए रवाना हो गई. टीम लीडर ने उससे बड़ी सहजता से बातचीत की और फिर उसे अपने साथ पुलिस स्टेशन लेकर आ गए.

नीलेश को मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां उसकी स्पेशल काउंसलिंग की गई. काउंसिलिंग का यह असर हुआ कि नीलेश ने आत्महत्या करने का विचार छोड़ खुशहाल जिंदगी जीने का फैसला कर लिया.

आत्महत्या क्यों करना! हम सब साथ-साथ जो हैं!

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “हम सब साथ-साथ जो हैं!

  1. अपमे अनमोल मानव जीवन को आत्महत्या जैसे कायराना उपाय से क्यों नष्ट करना. हर समस्या का समाधान होता है. किसी से बात करके तो देखो. हम सब साथ-साथ जो हैं! मुंबई पुलिस की सूझबूझ वाली भूमिका को सलाम, आत्महत्या को आमादा एक युवक नीलेश की जान बच गई, मामला जोन 12 पुलिस के तहत वनराई पुलिस का है. यहां खुदकुशी करने जा रहे नीलेश बेडेकर को समय रहते बचा लिया गया. सिपाही समीर की सूझबूझ को सलाम!

Leave a Reply