गीतिका/ग़ज़ल

अना सम्मान लहजा और तेवर छीन लेती है…

अना सम्मान लहजा और तेवर छीन लेती है
ग़रीबी क़द्र क्या दस्तार क्या सर छीन लेती है

पदों पर बैठने वालों न देखो सिर्फ़ अपनो को
ये ख़ुदगर्जी हुनरमंदों के अवसर छीन लेती है

हुकूमत पूछती है प्रश्न जब प्रश्नों के उत्तर में
रियाया के लबों से प्रश्न अक्सर छीन लेती है

दिखाकर भाषणों से ख़्वाब पक्के घर बनाने के
सियासत मुफ़लिसों के सर के छप्पर छीन लेती है

कभी मिलते नही यूँ तो सुकूं के पल बहुत मुझको
मिलें भी तो किसी की याद आकर छीन लेती है

धधकती है किसी के पेट में जब आग रोटी की
लबों से धर्म सच्चाई के आखर छीन लेती है

किसी की आँख से बहती है जब भी बेबसी बंसल
मेरी आँखो में उभरे शोख मंज़र छीन लेती है

सतीश बंसल
०३.०२.२०२०

परिचय - सतीश बंसल

पिता का नाम : श्री श्री निवास बंसल जन्म स्थान : ग्राम- घिटौरा, जिला - बागपत (उत्तर प्रदेश) वर्तमान निवास : पंडितवाडी, देहरादून फोन : 09368463261 जन्म तिथि : 02-09-1968 शैक्षिक योग्यता : High school 1984 Allahabad Board(UP) : Intermediate 1987 Allahabad Board(UP) : B.A 1990 CCS University Meerut (UP) वर्तमान ने एक कम्पनी मे मैनेजर। लेखन : हिन्दी कविता एवं गीत विषय : सभी सामाजिक, राजनैतिक, सामयिक, बेटी बचाव, गौ हत्या, प्रकृति, पारिवारिक रिश्ते , आध्यात्मिक, देश भक्ति, वीर रस एवं प्रेम गीत

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