लघुकथा

चुप्पी

अल्मारी की सफाई करते हुए उसे मिली वह 50 साल पुरानी चिट्ठी, जो उस जमाने के एक आने के पोस्ट कार्ड पर लिखी हुई थी।
शादी के बाद वह फेरा करने पति के साथ पहली बार दो दिन के लिए मायके गई थी तब। बस से महज पांच घंटे की ही यात्रा थी। अभी घर पहुंचे ही थे कि डाकिया ससुर जी का पोस्टकॉर्ड थमा गया। लिखा था- ”मेरी कमर में चूक पड़ गई है, जल्दी लौट आओ।”
उसे तो यही लगा था कि नाहक ही वह घर में देवर और ससुर जी को अकेले छोड़कर आई, अब वे दो दिन कैसे काम चलाएंगे?
पति ने बार-बार पोस्टकॉर्ड को उलट-पलटकर देखा था और बोले थे- ”यह पोस्टकॉर्ड हमारे घर से निकलने के पहले ही पोस्ट किया गया है। पोस्टकॉर्ड पर कल की तारीख है और आज हमारे साथ-साथ पहुंच भी गया।”
वह चुप रही थी, उसके पास कहने के लिए तब भी कुछ नहीं था और आज पचास साल बाद भी वह चुप्पी ही साधे हुए है।

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

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