गीत/नवगीत

प्रेम के गीत

वेलेंटाईन डे के अवसर पर विशेष

1.प्रेम प्रभु का वरदान है

 

प्रेम मन की आशा है,
करता दूर निराशा है,
चन्द शब्दों में कहें तो,
प्रेम जीवन की परिभाषा है.

प्रेम से ही सुमन महकते हैं,
प्रेम से ही पक्षी चहकते हैं,
चन्द शब्दों में कहें तो,
प्रेम से ही सूरज-चांद-तारे चमकते हैं.

प्रेम शीतल-मंद-सुवासित बयार है,
ऋतुओं में बसंत बहार है,
चन्द शब्दों में कहें तो,
प्रेम आनंद का आधार है.

प्रेम हमारी आन है,
प्रेम देश की शान है,
चन्द शब्दों में कहें तो,
प्रेम प्रभु का वरदान है.

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2.प्रेम जगत का सार है

प्रेम जगत का सार है,
कोई इसे कहता प्रीत, कोई कहता प्यार है,
यह प्रीत भी है, प्यार भी,
स्नेह भी है, दुलार भी,
प्रेम एक अनुपम उपहार है,
प्रेम जगत का सार है.
प्रेम आभास है, अहसास है,
प्रेम तृप्ति है, न बुझने वाली प्यास है,
प्रेम प्रारम्भ भी है, अंत भी,
प्रेम सीमित भी है, अनंत भी,
प्रेम मुखर भी है, मौनमय इज़हार है,
प्रेम जगत का सार है.
प्रेम जीवन की आशा है, अभिलाषा है,
प्रेम करता दूर निराशा है,
प्रेम शक्ति है, साहस की आहट है,
प्रेम खामोश है, झनझनाहट है,
प्रेम स्वीकृति है, सत्कार है,
प्रेम जगत का सार है.
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3.प्रेम के त्योहार
अभी कुछ दिन पहले वसंत पंचमी आई,
प्रेम का परम्परागत मदनोत्सव साथ लाई ।
जाते-जाते चुपके-से कान में शायद यह कह गई,
प्रेम के और भी त्योहार भी आने वाले हैं भाई ॥
ऐसे रंगबिरंगे गुलाबों को वसंत ले आया,
कि हमने प्रेम से रोज़ डे का त्योहार मनाया ।
प्रेम का वह त्योहार भी हौले से कह गया,
धीरज रखो वेलेंटाईन डे भी मान लो, आया-कि-आया ॥
इतने में वेलेंटाईन डे की आहट दे गई सुनाई,
फूलवालों की अपार मौज बन आई ।
कई दिन पहले से की गई बुकिंग पूरी करते-करते,
वेलेंटाईन डे की प्यारी शुभ वेला भी है आई ॥
इस दिन को भी सब उत्साह से मनाएंगे,
अपने प्यारों को प्यार के इज़हार से सजाएंगे ।
नववार से यानी प्रपोज़ डे से शुरु करके,
न जाने कब तक इसकी महक लुटाएंगे ॥
वेलेंटाईन डे भी जाते-जाते एक संदेश देता जाएगा,
तैयारी कर लो अभी तो प्रेम का ख़ास त्योहार होली का आएगा ।
होली पर भी सभी वैर-भाव भुलाकर गले लग जाएंगे,
प्रेम का अथाह सागर प्रेम की रंगीन हिलोरें लाएगा ॥
मानो तो, प्रेम प्रभु का अनुपम वरदान है,
प्रेम ही मानव की मानवता की पहचान है ।
प्रेम बिना जीना भी क्या सचमुच जीना है ?
सच्चे प्यार में तो समर्पण का अपना अलग ही स्थान है ॥
आइए, सब मिलकर प्रेम के इन त्योहारों को मनाएं,
प्रेम दिल खोलकर बांटें, मिले तो अवश्य निभाएं ।
प्रेम कोई व्यापार नहीं है और न ही लेन-देन का मोहताज है,
बस प्रेम बिना किसी शर्त के दें और जीवन सफल बनाएं ॥
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4.संबंध सुहाना है

है प्रेम से जग प्यारा, सुंदर है सुहाना है
जिस ओर नज़र जाए, बस प्रेम-तराना है-

बादल का सागर से, सागर का धरती से
धरती का अंबर से, संबंध सुहाना है-

तारों का चंदा से, चंदा का सूरज से
सूरज का किरणों से, संबंध सुहाना है-

सखियों का राधा से, राधा का मोहन से
मोहन का मुरली से, संबंध सुहाना है-

पेड़ों का पत्तों से, पत्तों का फूलों से
फूलों का खुशबू से, संबंध सुहाना है-

जन-जन में प्रेम झलके, हर मन में प्रेम छलके
मन का इस छलकन से, संबंध सुहाना है-

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5.मधुर मुझे मन मीत मिला

मधुर मुझे मन मीत मिला
उर का सुमन सप्रीत खिला-

कब से थी आकांक्षा आए
कोई मन का सुमन खिलाए
मधु मकरंद सुगंध सुवासित
शीतल पवन पुनीत मिला
मधुर मुझे मन मीत मिला.
एक मदिर-सा झोंका आया
प्रियजन का संदेशा लाया
मन में नव उमंग से पूरित
अनुप्राणित संगीत मिला
मधुर मुझे मन मीत मिला.

मन का सूना था जो कोना
कठिन बहुत था प्रमुदित होना
उसकी एक झलक से मेरे
शून्य हृदय को गीत मिला
मधुर मुझे मन मीत मिला.
चारों ओर बयार सुहावन
लगती है सुखकर मनभावन
जीवन को जीवंत बनाता
सौय सुमधुर सुमीत मिला
मधुर मुझे मन मीत मिला

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परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “प्रेम के गीत

  1. प्रेम व्याप्त है यहां-वहां-सर्वत्र,
    प्रेम ही बनाता-बनवाता है मित्र,
    प्रेम-सा नहीं है अनमोल भाव इस जहां में,
    प्रेम ही है सबसे अधिक सुवासित इत्र.

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