लघुकथा

सपनी

सारी दुनिया की सैर करने के बसंती के सपने का क्या हुआ, कुछ पता नहीं! कभी ससुराल की बंदिशें, कभी बच्चों की पढ़ाई और फिर कैरियर आड़े आते रहे. इसी ऊहापोह में उम्र के 75 बसंत कब निकल गए, पता ही नहीं चला. सपना जिंदा था, धन की कमी भी नहीं थी, लेकिन!

यही लेकिन! अब उसके सामने प्रश्नचिह्न बनकर उभर आया था. वह दुनिया घूमना चाहती थी, अब उसका सिर घूमता था.

आज फिर प्रातःकाल पॉर्क में सैर करते हुए सिर में चक्कर आने के कारण उसके सामने आगरा का ताज भी आ गया, तो दुबई का बुर्ज ख़लीफ़ा भी, वो तो भला हो उस अनजान शख्स शकील भाई का, जिन्होंने पीछे से ही उसे गिरते-उतराते देखकर उसैन बोल्ट से भी तेज दौड़ लगाकर उसे थाम लिया और बेंच पर बिठा दिया, फिर घर छोड़ आए.

”लो अब सिर घूमने लग गया! यहीं सारी दुनिया दिख गई! ऐसी हालत में दुनिया क्या घूमूंगी?” उसने घर जाकर पतिदेव से कहा.

”ठीक है. अब हम न पूरा देख पाते हैं, न सुन पाते हैं, पहले मेरे दिल की धड़कन तेज होने के कारण नमक कम खाना, फलस्वरूप अब सोडियम की कमी के कारण तुम्हारा सिर घूमना शुरु हो गया है! चलो, बड़ा-सा सपना न सही, छोटी-सी सपनी ही पूरी करते हैं. अब तक अपने बच्चों के लिए ही सब कुछ किया है, अब इस धनराशि से अनाथ बच्चों की शिक्षा के लिए कुछ करके देखते हैं.” सहमत बसंती की आंखों में खुशी के चंद आंसू झलक आए थे.

कुछ ही देर में ही वे एक-दूजे का हाथ थामकर अनाथालय की ओर जा रहे थे.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “सपनी

  1. सिर में चक्कर आने के कारण
    घुमरी (वर्टिगो) एक विशिष्ट चिकित्सीय अवस्था है जिसमे या तो सिर घूमता हुआ प्रतीत होता है या चारो ओर की वस्तुएँ घूमती प्रतीत होती हैं। कई लोगों को सिर चकराना बहुत परेशान करता है और अक्सर मतली और उल्टी की परेशानी इसके साथ होती हैं . यह चक्कर आने वाली घटनाओं के मामलों का 25% का प्रतिनिधित्व करता है।[5]
    असंतुलन (डिसइक्वीलिब्रियम), असंतुलन की अनुभूति होती है और अक्सर किसी विशिष्ट दिशा में गिर जाने के लक्षण से विशेषित होती है इस हालत में अक्सर मतली या उल्टी के लक्षण नहीं रहते हैं
    मस्तिष्क की रक्ताल्पता (प्रीसिंकोप या लाइटहेडेडनेस) मांसपेशी की कमजोरी और मूर्छा की अनुभूति से जानी जाती है, यह सिंकोप जो की बेहोशी की अवस्था है उससे अलग होती हैं।
    गैर विशिष्ट चक्कर अक्सर मनोरोग से उत्पत्ति लेती हैं। यह बाकी कारणो के नहीं होने पर माना जाता है और कभी कभी तेज लंबी गहरी और निरंतर श्वांश (हाइपर्वेंटीलेसन) से भी शुरू हो सकती हैं।[

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