भजन/भावगीत

हरिगीतिका छन्द वंदना

विनती सुनो प्रभु पातकी की ,भय क्षरण  मम कीजिये  ।
निष्काम मेरी प्रार्थना  प्रभु ,रख पगों में लीजिये ।
तुलसी सजी हो बीच तन पर ,अंत हो जब श्वास का ।
जल गंग का मुख में डले तब ,प्रश्न हो जब प्यास का ।
मुझको पुकारें आप जिस  क्षण , तिथि रहे एकादशी।
पाऊँ जनम जग में नहीं फिर ,है अरज इक नाथ जी ।
प्रभु आपके दर प्राण निकलें ,करम इतना कीजिये ।
निष्काम  मेरी प्रार्थना   प्रभु ,रख  पगों में  लीजिये ।
— रीना गोयल 

परिचय - रीना गोयल

माता पिता -- श्रीओम प्रकाश बंसल ,श्रीमति सरोज बंसल पति -- श्री प्रदीप गोयल .... सफल व्यवसायी जन्म स्थान - सहारनपुर .....यू.पी. शिक्षा- बी .ऐ. आई .टी .आई. कटिंग &टेलरिंग निवास स्थान यमुनानगर (हरियाणा) रुचि-- विविध पुस्तकें पढने में रुचि,संगीत सुनना,गुनगुनाना, गज़ल पढना एंव लिखना पति व परिवार से सन्तुष्ट सरल ह्रदय ...आत्म निर्भर

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