कविता

पर हम पागल है

हम खेलते मिट्टी में
और उछालते कूड़ा
ये न समझो शरारत है
पर हम पागल है!

कभी नाचते सड़क पर
और दौड़ते कीचड़ में
ये न समझो आदत है
पर हम पागल है!

कभी घूमते काँटों पर
खाना खाते कचरे का
ये न समझो लालच है
पर हम पागल है!

आप मुझे समझाते
डंडा खूब दिखाते
ये न समझो सादर है
पर हम पागल है!

परिचय - अशोक बाबू माहौर

जन्म -10 /01 /1985 साहित्य लेखन -हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में संलग्न प्रकाशित साहित्य-विभिन्न पत्रिकाओं जैसे -स्वर्गविभा ,अनहदकृति ,सहित्यकुंज ,हिंदीकुंज ,साहित्य शिल्पी ,पुरवाई ,रचनाकार ,पूर्वाभास,वेबदुनिया आदि पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित I साहित्य सम्मान -इ पत्रिका अनहदकृति की ओर से विशेष मान्यता सम्मान २०१४-१५ से अलंकृति I अभिरुचि -साहित्य लेखन ,किताबें पढ़ना संपर्क-ग्राम-कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111 ईमेल- ashokbabu.mahour@gmail.com 9584414669 ,8802706980

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