लघुकथा

रोमांचक नजारा

”आज शाम 5 बजे ताली और थाली बजाने के लिए तैयार हो न!” सुगंधा ने पड़ोसी की बेटी सिंधूरा से इंटरकॉम पर पूछा.
”बजा लेंगे!” हमेशा हंसमुख रहने वाली सिंधूरा की आवाज से जरा तंज़ की भनक मिल रही थी.
”बजा लेंगे मतलब! खुशी से नहीं!” सुगंधा ने पक्का करने के इरादे से पूछा.
”आंटी ताली और थाली तो बजा लेंगे, पर मुझे समझ नहीं आ रहा कि ताली और थाली बजाने से कोरोना कैसे रुकेगा-थमेगा-भगेगा?” कॉलेज में पढ़ने वाली आधुनिका सिंधूरा भी शायद अपनी जगह सही ही थी, बोली-”आपका क्या कहना है आंटी जी?”
”बेटा ऐसा है कि जनता कर्फ्यू के कारण सुबह से हम लोग आइसोलेशन में बैठे हुए हैं, कोई किसी की शक्ल नहीं देख पा रहा, कम-से-कम शाम पांच बजे हम सब एक-दूसरे की शक्ल देख पाएंगे, हाल-चाल पूछ पाएंगे और अपनी एकजुटता दिखा पाएंगे.”
”हां आंटी यह तो है ही, वैसे ताली और थाली बजाने का कोई फायदा तो होता ही होगा, आपको तो जानकारी होगी ही!”सुगंधा ने कहा.
”हां बेटा, ताली और थाली बजाने का प्रमुख मकसद है इरादों को मजबूत करना. कोरोना पर जीत हासिल करने के लिए सबसे पहले हमारे इरादों का मजबूत होना जरूरी है. हमारे हाथों में शरीर के अभी अंगों के एक्यूप्रेशर पॉइंट्स हैं, ताली बजाने से सभी अंगों का एक्यूप्रेशर हो जाता है और मन में सकारात्मकता और प्रसन्नता का संचार होता है.”
”वाउ आंटी, ”That is great! और?” सिंधूरा को शायद सुनने में मजा भी आ रहा था.
”हमारे यहां बच्चे के जन्म के समय थाली बजाकर खुशी जाहिर करने की परंपरा है. इससे भी घर से नकारात्मकता दूर जाती है और सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि होती है. इसके अतिरिक्त शंख, सूप-डगरा बजाने, ओम का उच्चारण करने, घंटी-घड़ियाल बजाने की ध्वनि का एक वैज्ञानिक पहलू भी है. एक खास तरह की ध्वनि से चिकित्सा भी की जाती है, जिसे ध्वनि-चिकित्सा कहते हैं. वैज्ञानिक भी मानते हैं कि ध्वनि के विशेष कंपन्न से मन और मस्तिष्क प्रभावित होता है, जो शरीर की कोशिकाओं को ऐक्टिवेट करता है और रोगों से बचाता है.”
”अच्छा आंटी जीSSS! मैं घर में सबको शाम 5 बजे ताली और थाली बजाने के लिए तैयार करती हूं, मिलते हैं शाम को 5 बजे बालकनी में.”
सुगंधा को भी शाम के पांच बजने के उस रोमांचक नजारे की प्रतीक्षा थी.
22.03.2020

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

2 thoughts on “रोमांचक नजारा

  1. अद्भुत
    नजारा था ,
    मानो
    देवताओं का धरा पर आगमन हो रहा
    और
    उनके स्वागत में
    समस्त आकाश व धरा
    ताल , थाल , घंटी , घंटा व शंखनाद
    से
    स्वत: गुंजायमान हो रहा है ,,,
    अबतक
    के अपने जीवन में पहली बार गूंजता देखा धरा व अंबर

  2. कोरोना वायरस के खिलाफ जंग शुरू हो चुकी है। देश में आज जनता कर्फ्यू लागू है, जिसका लोग सपॉर्ट करते दिख रहे हैं। देशभर से ऐसी तस्वीरें आ रही हैं, जिनसे साफ पता चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी की अपील का लोगों पर असर हुआ है।

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