कविता

कोरोना

आज शाम का नज़ारा,
बहुत अद्भुत था ,
हर एक के मन को,
रोमांचित कर रहा था।।
हर कोई एक जुट हो कर ,
तैयार था लड़ने को ,
“कोरोना ” वाली बीमारी से,

कोरोना तुम ही नहीं ,
सभी देश के दुश्मन को ,
सबक है आज मिला ,
जरूरत हुई तो देशवासी,
हर खतरे, दुश्मन से लड़ लेंगे।

देशवासियों तुम भी सुनो ,
आज ही नही एकजुट हो,
हर कदम पर एकजुट रहना है ,
दुश्मन कोई भी हो सामने,
मुसीबत हो कैसी भी ,
एकजुट हो कर लड़ना है ।

आओ आज संकल्प ले हम
ऐसे ही एक साथ रहेंगे,
जब भी आएगी कोई ,
मुसीबत बड़ी या छोटी।।

— डॉ सारिका औदिच्य

*डॉ. सारिका रावल औदिच्य

पिता का नाम ---- विनोद कुमार रावल जन्म स्थान --- उदयपुर राजस्थान शिक्षा----- 1 M. A. समाजशास्त्र 2 मास्टर डिप्लोमा कोर्स आर्किटेक्चर और इंटेरीर डिजाइन। 3 डिप्लोमा वास्तु शास्त्र 4 वाचस्पति वास्तु शास्त्र में चल रही है। 5 लेखन मेरा शोकियाँ है कभी लिखती हूँ कभी नहीं । बहुत सी पत्रिका, पेपर , किताब में कहानी कविता को जगह मिल गई है ।