कविता

खुश रहने का कोई बहाना ढूंढो प्यारो!

खुश रहना एक कला है,
जो चाहे खुश रह सकता है,
जहां चाहे खुश रह सकता है,
जैसे चाहे खुश रह सकता है,
इसके लिए कोई बहाना नहीं ढूंढना पड़ता,
फिर भी जरूरत पड़े तो,
खुश रहने का कोई बहाना ढूंढो प्यारो!

क्या कहा?
सोशल डिस्टेंसिंग से दुःखी हो?
अकेलापन महसूस करते हो?
सोशल डिस्टेंसिंग ने अनुशासन सिखा दिया है,
दूरी बनाकर धैर्य से लाइन में लगना सिखा दिया है,
खरीदारी करने का सही रास्ता दिखा दिया है,
सच कहें तो सोशल डिस्टेंसिंग ने,
कोरोना से लड़ने के चलते आपस में लड़ना छोड़ना सिखा दिया है,
सही मायने में जीना सिखा दिया है.
सही मायने में जीने का कोई बहाना ढूंढो प्यारो!

क्या कहा?
अकेलापन सताता है?
अकेलापन पीड़ादायक है,
अरे अकेलापन पूजा है, तपस्या है,
तो अकेलापन एक वरदान भी है,
पूछो उनसे, जो अकेलेपन को तरसते हैं,
अब
अकेलेपन में अपनी मर्जी से जगते हैं,
अपनी मर्जी से बनाते-खाते हैं,
अपनी मर्जी से काम करते हैं,
अपनी मर्जी से बात करते हैं,
कोई टोकाटोकी नहीं,
कोई लड़ाई-झगड़ा नहीं,
न कामवाली की प्रतीक्षा,
न काम की किच-किच,
झाड़ू-पोंछा लगाओ, वजन घटाओ,
बस मौज-ही मौज है,
मौज लूटने का कोई बहाना ढूंढो प्यारो!

क्या कहा?
बोर हो जाते हो?
अरे बोर होने का समय ही कहां मिलता है,?
जो काम वैसे नहीं कर पाते अब करो,
सोशल डिस्टेंसिंग के चलते
माता-पिता से हालचाल पूछो,
बच्चों के साथ खेलो,
पत्नि का हाथ बंटाओ,
दोस्तों से गपशप करो,
रिश्तेदारी को ताजा करो,
बेहतरीन फिटनेस के लिए एक्सरसाइज करो,
बच्चों की पढ़ाई की सुध लो,
अपने छूटे हुए शौक पूरे करो,
तनिक खुद से भी मुलाकात करो,
खुद से मुलाकात करने का कोई बहाना ढूंढो प्यारो!

क्या कहा?
मन नही बहलता?
अरे मन तो तुम्हारा गुलाम है,
थोड़ी समझदारी से काम लो,
जो अब तक नहीं कर पाए, अब करो,
लेखन-सृजन करो,
दूसरों की मदद करो,
जल्दी में हाय-हल्लो करते थे,
अब जरा प्यार से, विनम्रता से बात करो,
भूली-बिसरी किताबें पढ़ो,
बच्चों के लिए कॉमिक्स लिखो,
कार्टून बनाओ,
पेंटिंग के हुनर को चमकाओ,
नई-नई रेसिपी सीखो,
नाचो-गाओ-खुशी मनाओ,
नाच-गाकर मन को तनाव से मुक्त करो,
हंसो-मुस्कुराओ, कोरोना को भगाओ,
मन को वश में करने का कोई बहाना ढूंढो प्यारो!
कोई बहाना ढूंढो प्यारो!!
कोई बहाना ढूंढो प्यारो!!!

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

2 thoughts on “खुश रहने का कोई बहाना ढूंढो प्यारो!

  1. प्रिय पाठकगण, हमने श्रंखला ‘कोरोना: काव्य-रचनाएं आपकी-हमारी- 1’ शुरु की थी. आपकी काव्य-रचनाएं आती रहेंगी, तो यह श्रंखला जारी रखी जा सकती है.

  2. खुश रहने का कोई बहाना ढूंढो प्यारो! खुश रहने का कोई बहाना तो ढूंढना ही पड़ेगा.
    ढूंढो तो हर खुशी मिलती है,
    वरना मन उदास हो जाता है
    ग़म का अखंड राज हो जाता है.

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