धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

विज्ञान और अध्यात्म – कोरोना के विरुद्ध दो अचूक शस्त्र

कोरोना जैसे दानव का हमारे देश ही नहीं अपितु समस्त विश्व पर भीषण आघात अत्यंत दुख:द एवं भयावह है । कुछ ही समय में इस महामारी रूपी दानव ने जिस प्रकार अपना विकराल रूप धारण कर मृत्यु का तांडव किया है, उसे देख कर लगता है कि इस संकट से जुझते हुए सम्पूर्ण रूप से अपने देश व विश्व की रक्षा कर पाना हम मानवों के लिए लगभग असंभव सा प्रतीत हो रहा है, विश्व के सभी देश डरे हुए हैं क्योंकि उनके पास इस समस्या का कोई शत-प्रतिशत समाधान नहीं है।
हम अपने देश के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह ध्यान से सुनें और उनका शत प्रतिशत पालन करें और सोशल डिस्टेन्सिंग बनाए रखें ,भीड़ के रूप में इकट्ठे न हों ,सेनेटाइज़र का प्रयोग करें ये सावधानियाँ रखना जितना आवश्यक है उतना ही आवश्यक है कि हम समस्त विश्व के लोग ईश्वर से भी प्रार्थना करें कि वो इस संकट की घड़ी में हमारी रक्षा करें ।
मित्रों मेरा मानना है कि इस समस्या का सामना करने के लिए हमें वैज्ञानिक तकनीकों के साथ-साथ आध्यात्मिक तकनीकों का अवलंबन भी लेना चाहिए। हमारा ये प्रयास इस कोरोना रूपी दानव पर दोहरी मार साबित होगा । समस्त विश्व जो इस संकट से त्रस्त उसके लिए हमें अपने मन में ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:,सर्वे संतु निरामया’ का भाव रखते हुए अपने आस-पास की नकारात्मकता को कम करने के लिए हमें अधिक से अधिक जप करना चाहिये । जप करने से हमारी मन:स्थिति सुदृण होगी और हम इन विकट परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम होंगे ।
इस विश्व व्यापी महामारी में जो लोग अपनी जान गँवा बैठे हैं उनकी आत्मा की शांति के लिए तथा उनके परिजनों को इस असहय दुख को सहन करने की शक्ति और हृदय की शांति के लिए हमें प्रतिदिन महामृत्युंजय मंत्र और गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए इन दोनों मंत्रों का जप आपके प्राणशक्ति को सुदृण कर अकाल मृत्यु के भय से मुक्त करने वाला है । अपने घर में प्रतिदिन तीन बार गूगल धूप करें और गहरे श्वास लेते हुए प्राणायाम करें, जो लोग सुदर्शन किया जानते हैं वे पूरे मनोयोग से करें हो सके तो घर के सभी परिजन मिलकर जिस भी देवी-देवता को मानते हो उनके नाम की आहुतियाँ समर्पित करें और परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करें कि हे ईश्वर! मैं अपनी ओर से जो कुछ भी सावधानियाँ रखने में समर्थ था मैंने वो सभी सावधानियाँ कर रखीं है परंतु आप अपनी कृपा और अनुग्रह कर मेरे सभी प्रयासों को सफल बनाकर मुझे इस संकट से बाहर निकालें , मनुष्य ने अपनी नासमझी और अमानवीय पाशविक पृवृत्ति के कारण जिस संकट को जन्म दिया है उसके लिए ईश्वर हमें क्षमा करें और समस्त विश्व को इस संकट से मुक्ति दिलाएँ।

— पंकज कुमार शर्मा ‘प्रखर’

परिचय - पंकज 'प्रखर'

लेखक एवं वरिष्ठ स्तम्भकार हुआ यूँ की ज़िन्दगी थोडा ठहरी और वक्त मिला भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने का तो अपने आस-पास घटने वाली समस्याओं से मन कसमसाया और अचानक ही दृश्य शब्दों के रूप में परिवर्तित होकर कागज़ पर उभर आये | पिछले दो तीन वर्षों से लिख रहा हूँ मेरे लेख,कहानियाँ और व्यंग कई राष्ट्रीय समाचार पत्र और पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके है| मेरा सबसे प्रथम लेख था “हिन्दी का दयनीय वर्तमान” और सबसे पहली व्यंग रचना थी“असहिष्णुता ”जो लोगों द्वारा बहुत पसंद की गई| आज भी पूरी ईमानदारी के साथ अपने लेखों का नियमित सृजन कर रहा हूँ...................... ,

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