कविता

देखता हूँ रोज उसे

देखता हूँ रोज उसे
चौराहे पर -और
लाल बत्ती के पास
अपने हाथों में लेकर
रंग बिरंगे गुब्बारों को
घूम घूम कर बेचती है
वह ,
भोली सी सूरत वाली
सांवली सी लड़की है
जो …,
आँखों में लिए एक चमक
और -चेहरे पर भोली सी
मुस्कान के साथ
देखता हूँ रोज उसे
गुब्बारों को बेचते हुए
सड़क के फुटपाथ पर
सुबह से शाम तक
वह ,
कड़कती सर्दी हो या
झुलसाती गर्मी हो या
फिर बरसात का मौसम
वह रोज बेचती है
अपने सपनों को -और
अपनी खुशियों को
इन गुब्बारों में भर कर
फुटपाथों पर या फिर
लाल बत्ती के चौराहों पर
देखता  हूँ  रोज  उसे !
— शशि कांत श्रीवास्तव 

शशि कांत श्रीवास्तव

1- नाम :- शशि कांत श्रीवास्तव 2- पिता का नाम :- स्व श्री तारा प्रसाद श्रीवास्तव 3- माँ का नाम :- स्व सरोजनी श्रीवास्तव 4- स्थाई पता :- शशि कांत श्रीवास्तव "प्रतिभास" 726/12, स्ट्रीट न0 - 09 शक्ति नगर डेराबस्सी मोहाली पंजाब Pin . 140507 5- फोन नं. :- 9646453610 6- जन्म तिथि :- 08-11-1963 7- शिक्षा :- इंटरमीडिएट ( विज्ञान ) 8- व्यवसाय :- नौकरी 9- प्रकाशित रचनाओं की संख्या :- कुल चौदह रचना 10- प्रकाशित पुस्तकों की संख्या :- आठ साझा संग्रह 11- सम्मान का विवरण :- साहित्यिक उपलब्धि : > प्रथम काव्य संग्रह ,"ख़्वाब के शज़र " श्री सत्यम प्रकाशन के सौजन्य से प्रकाशित " प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह " सम्मान स्वरुप > "भावांजलि -काव्य स्मारिका प्रथम " में रचना प्रकाशित > "बज़्मे- ऐ -हिन्द " काव्य संग्रह में प्रकाशित रचना दैनिक वर्तमान अंकुरके सौजन्य से प्रकाशित "प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह " सम्मान स्वरुप > साहित्यिक संस्था -साहित्यपीडिया द्वारा ऑनलाइन काव्य प्रतियोगिता "माँ " में .. सम्मान स्वरूप --प्रशस्ति पत्र ,प्राप्त हुआ ,और रचना "माँ " पार्ट 2 में प्रकाशित हुई .. > इसके अतिरिक्त कई न्यूज़ पोर्टल और समाचार पत्रों में समय समय पर प्रकाशित होती रहती हैं .