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गुरमैल भाई द्वारा धन्यवाद-ज्ञापन

”वक्त के शैदाई, रविंदर भाई: 125वें ब्लॉग की बधाई” ब्लॉग में हमने 5 अप्रैल को लिखा था-

पुनश्च-
आपको यह जानकर अत्यंत हर्ष होगा कि आगामी 14 अप्रैल को गुरमैल भाई के जन्मदिन और विवाह की सालगिरह है. आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि शीघ्र ही किसी-न-किसी रूप में अपना-अपना संदेश हमारे पास भेज दें, ताकि समय पर उनको कोटिशः हार्दिक बधाइयां व शुभकामनाएं दी जा सकें.”

हमने गुरमैल भाई से भी पूछा था, कि इस जन्मदिन पर आपकी क्या योजना है?

गुरमैल भाई ने तुरंत जवाब दिया-

”लीला बहन, इस साल हमने बच्चों से भी कह दिया है कि नहीं मनाएंगे, क्योंकि चारों तरफ हमारे लोग जानें गँवा रहे हैं. इंग्लैंड में प्रपोर्शनली हमारे लोग तीसरा हिस्सा जानें गँवा रहे हैं. हर रोज़ तकरीबन एक हज़ार लोग इस दुनिया से रुखसत हो रहे हैं. एथनिक माइनौरिटीज़ सब से ज्यादा जा रहे हैं. ऐसे में मन नहीं मानता. बाकी आप बर्थडे पर जो चाहें लिख दीजिएगा.”

कोरोना के इस संकट के समय सबसे बड़ी दवा है- ”खुश रहना और खुश रखना”. गुरमैल भाई के दोहरी बधाई वाले दिन को तो मनाना ही था, सो हमने ब्लॉग लिखा-
”डिजिटल सेतु के सुदृढ़ स्तंभ गुरमैल भाई, दोहरी बधाई”

कुसुम सुराणा जी और चंचल जैन जी के संदेश समय पर मिल गए थे, वे हमने ब्लॉग पर ही लिख दिए थे.

इसके बाद हमेशा की तरह सभी पाठकों की समस्त प्रतिक्रियाएं गुरमैल भाई को भेज दी थीं.
”लन्दन में बैठे गुरमेल जी के जन्मदिन, बैसाखी पर उन्हें यह तोहफा कृपया भिजवा दीजिये. प्रिंस चार्ल्स ने सोमवार को वैसाखी के मौके पर यूके और कॉमनवेल्थ में सिख समुदाय को “लख लख वधाइयां” देने के लिए एक वीडियो संदेश जारी किया। इसके साथ ही उन्होंने कोरोना वायरस से लड़ाई में ब्रिटिश-सिख समुदाय की “निस्वार्थ सेवा” की प्रशंसा की। ब्रिटिश सिंहासन के 71 वर्षीय वारिस प्रिंस चार्ल्स को पिछले महीने कोविद-19 से संक्रमित पाया गया था। इसके बाद उनका गहन इलाज किया गया, जिसके बाद वह स्वस्थ हो गए थे।उन्होंने संदेश की शुरुआत में कहा- “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह”।इस सब में मुझे यह लगता है कि सिखों ने बहुत ही अच्छे तरीके से उन मूल्यों को अपनाया है, जिन पर गुरु नानक ने पांच शताब्दियों पहले आपके धर्म की स्थापना की थी। अपने आप से कम भाग्यशालीलोगों के लिए निस्वार्थ सेवा, कड़ी मेहनत और सम्मान। उन्होंने कहा कि वह और उनकी पत्नी कैमिला, डचेस ऑफ कॉर्नवाल, सिख समुदाय के सभी “उत्कृष्ट प्रयासों” के लिए आभारी हैं।”
-रविंदर सूदन

न गिला करता हूँ, न शिकवा करता हूँ, आप सलामत रहो बस यही दुआ करता हूँ, कहीं भी रहूं, कितना भी रहूं व्यस्त, जन्मदिन में आपको याद किया करता हूँ.
-रविंदर सूदन

ये दिन ये महीना ये तारीख जब जब आई, हमने कितने प्यार से जन्मदिन की महफ़िल सजाई, हर शमा पर नाम लिख दिया दोस्ती का, इसकी रौशनी में तेरी चाँद जैसी सूरत समाई, जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक गुरमेल भाई.
-रविंदर सूदन

आदरणीय गुरमैलजी, आपके जन्मदिन और विवाह की सालगिरह के अवसर पर आपको हार्दिक शुभकामनाएँ. आदरणीय लीला बहन आपसे निवेदन है कि मेरा संदेश उन तक पहुँचा देना.
-इंद्रेश उनियाल

”वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से,
वो और थे जो हार गए आसमान से

अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल,
हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया

वो कोई और चिराग होते हैं जो हवाओं से बुझ जाते हैं,
हमने तो जलने का हुनर भी तूफानों से सीखा है

ये जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं,
वही दुनिया बदलते जा रहे हैं

लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं,
हमने उस हाल में जीने की क़सम खाई है

भँवर से लड़ो तुंद लहरों से उलझो,
कहाँ तक चलोगे किनारे किनारे

हौसले को हौसला दिखाते इस युगल से आप सभी परिचित हैं — आदरणीय दादा गुरमैल जी और दादी कुलवंत कौर जी — 14 अप्रैल की तारीख़ भी आपकी ज़िन्दगी के सफों पर ख़ुद कर ख़ुद को खुशनसीब मानती होगी — बाक़ी तारीख़ें जलती होंगी — ज़िन्दगी का साथ भी और ज़िन्दगी का साथी भी — आप दोनों को सादर चरणस्पर्श करते हुए बधाई का गुलदस्ता पेश करता हूँ — इस गुलदस्ते में आपकी सेहत अच्छी रहे, आपकी ज़िन्दगी लम्बी हो, ऐसे फूलों के गुच्छे लाया हूँ

उसे गुमाँ है कि हमारी उड़ान कुछ कम है,
हमें यक़ीं है कि ये आसमान कुछ कम है

बेशक — आप दोनों की ज़िन्दगी, आप दोनों का हौसला, आपके दिल की रोशनाई है जो दुनिया में छाई है

वो कहते हैं हम कुछ करते नहीं, हमने हौसला उन्हीं से सीखा है

आप दोनों इस ज़मीं की मुक़द्दस शख़्सियतें हैं — آپ کی سالگرہ اور شادی کی سالگرہ کی مبارکباد —

तूफान में हम अपनी ख़ुशी चाहते हैं,
जान हथेली पे लिए जी जाते हैं,
तुम वो समुन्दर जिन्हें खा जाता है,
हम वो जो समुन्दर को पी जाते हैं

आपके लिए कहूंगा

हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें,
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं,

साहिल के सुकूँ से किसे इंकार है लेकिन,
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है

ख़्वाब टूटे हैं मगर हौंसले ज़िन्दा हैं,
हम वो हैं जहॉ मुश्किलें शर्मिदा हैं…!!

हौसलों के अज़ीम तरीन सौदाग़र ! हौसले भी किसी हकीम से कम नहीं होते, हर तकलीफ़ में ताकत की दवा देते हैं — आप दोनों इंसानियत की जीती जागती मिसाल हैं —

फ़रिश्ते से बढ़ कर है इंसान बनना,
मगर इस में लगती है मेहनत ज़ियादा

इस सदाबहार जोड़ी का कहना है

रख भरोसा खुद पर क्यों ढूॅढता है फरिश्ते,
पंछियों के पास कहाँ होते हैं नक्शे फिर भी ढूंढ लेते हैं रस्ते

क्यों हारते हो हिम्मत, हिम्मत के तुम ही हो ख़ुदा,
ये वो चीज़ है जो बाज़ार में नहीं बिकती
ये तुम्हारे अंदर ही मिलती है

ओ नाखुदा इतना उठाओ खुद को कि कह सको –

हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं,
हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं

आप दोनों से सभी के लिए दुआ-ऐ-खैर चाहता हूँ

आदरणीय दीदी, सादर प्रणाम। ये खबर छपवा कर और ऐसी हसीं जोड़ी से मुलाक़ात करवा कर बहुत ही शानदार काम किया है — तहे दिल से शुक्रिया.
-सुदर्शन खन्ना

आदरणीय गुरमेल भाई जी, आपको जन्मदिन और सालगिरह की हार्दिक शुभकामनाएं। कभी खुशी कभी गम, यह प्यार कभी ना हो कम, खिलते रहो एक दूजे की आंखों में ,महकते रहो एक दूजे के दिल में, बढ़ते रहो सफलताओं के साथ में, प्यार में ,तकरार में ,जीत में ,हार में ,हर पल हर लम्हा प्यार यूं ही बढ़ता रहे।। एक बार फिर आपको बहुत-बहुत बधाई हो।
-कृष्ण सिंगला

इस पर गुरमैल भाई का धन्यवाद-ज्ञापन आया है, जो हम प्रकाशित कर रहे हैं. ये सभी काम डिजटल सेतु यानी मेल-फेसबुक के जरिए हो रहे हैं. धन्यवाद-ज्ञापन इस प्रकार है-

”लीला बहन, कल आप सब ने मिलकर मेरा जन्मदिन और हमारी सालगिरह का दिन बहुत धूमधाम से मना दिया। सच तो यह है कि हम ने ऐसा सोचा नहीं था जिसका ज़िकर कुछ दिन पहले मैंने आप से किया था कि कोरोना वायरस की वजह से जो हो रहा है उस को देख कर मन नहीं मानता था लेकिन यकीन मानो कल का दिन पहले से भी ज्यादा अच्छा मनाया गया। बच्चों ने डिजिटल सेतु के जरिये बहुत कुछ भेजा और बेटा बहू और पोतों ने खिड़की से केक अंदर रख दिया और वहीँ काटा गया और वहीँ विश कर दिया। कुलवंत ने ढेर-सी चीज़ें बनाई हुई थीं ख़ास कर कई तरह के पकौड़े. रेडियो पर तो दो घंटे इतनी विशेज आईं और गाने लगाए गए कि कुलवंत को रोना आ गया।

इधर आप सबने भी मिल कर हमारा दिन बना दिया। रविंदर भाई जी , हम आप का धन्यवाद करते हैं जो इतने प्यार से डिजिटल सेतु के माध्यम से कीमती तोहफे भेजते हैं। प्रिंस चार्ल्स के बारे में आप ने लिखा है, वाकई सिक्खों ने इस मुसीबत की घड़ी में बहुत काम किया है। बहुत गुरदुआरों के वॉलंटिअर, बेघर लोगों को खाना खिलाते हैं, बूढ़ों के घर जा कर उन्हें राशन देते हैं । कुछ दिन हुए बीबीसी टूर पे सिक्खों के इतिहास की डॉक्यूमैंट्री दिखाई थी जिसने सिक्खों का सर ऊंचा कर दिया। आप भी इसे देख सकते हैं। लंगर की प्रथा को अब बहुत देश जानते हैं और बिदेशी लोग हरमंदिर साहब जा कर लंगरखाने की डाकूमैंटरियां बना कर यू ट्यूब में दिखाते हैं। बहुत-बहुत धन्यवाद रविंदर भाई।

इंद्रेश जी, आप का तोहफा भी मिल गया। बहुत-बहुत धन्यवाद। हमारी ख़ुशी में शामिल हो कर आप ने हमें धन्य कर दिया।

सुदर्शन भाई , आप की क्या बात करूँ, आप ने तो हमारे इस दिन को कविताओं के रंग में भिगो दिया। इतनी हमारी औकात नहीं थी जितने तोहफों से आप ने हमारी झोली भर दी। आप ने तो उर्दू में भी मुबारकवाद का तोहफा भेज दिया । बहुत-बहुत धन्यवाद सुदर्शन भाई। आप शायद मेरी बात पर हँसें, खंने की एक बात आज तक मुझ को याद है। १९५७ ५८ में जलंधर रेडियो से एक देहाती प्रोग्राम प्रसारित हुआ करता था जो गाँव में सारे लोग सुनते थे। इस प्रोग्राम के अंत में मंडियों के भाव बताया करते थे कि इस मंडी में गेंहूं कितने रूपये क्विंटल और इसी तरह दालों के भाव बताया करते थे। हर एक मंडी की कीमतें बताते थे जिस में खन्ना मंडी का भी ज़िकर आता था। मेरे बाबा जी बहुत ध्यान से सुनते थे। एक दिन वो कहने लगे, ” अज्ज खंने मंडी दा भा नहीं दस्स्या “, बात तो यह मामूली है लेकिन बाबा जी की वह बात नहीं भूली और जब आप का नाम आता है तो मुझे बाबा जी की याद आ जाती है।

कुसुम जी, आप भी लीला बहन के डिजिटल सेतु के माध्यम से तोहफे ले कर आये और हमारे दिन को सही मायनों में दिन बना दिया। बहुत-बहुत धन्यवाद कुसुम जी।

चंचल जैन जी, आप ने भी इस डिजिटल सेतु का उपयोग किया और हमारे घर आ कर दिन को सही मायनो में दिन बना दिया। मेरे पास उचित शब्द नहीं जिस से आप का धन्यवाद कर सकूं .आपने हमारे दिन को चार चाँद लगा दिए। भगवान आप को सदैव खुश रखे।

कृष्ण सिंगला जी, आप की शुभकामनाएं पहुँच गईं. आपने हमारी ख़ुशी में शामिल हो कर इस वर्ष के हमारे इस दिन को चार चाँद लगा दिए. बहुत-बहुत धन्यवाद .🙏

गुरमेल और कुलवंत भमरा

गुरमैल भाई, आपकी दोहरी बधाई का यह दिन किसने नहीं मनाया! जय विजय में लेख छपे, सार्थक साहित्य मंच ने आपको विशेष रूप से विश किया और सम्मानित किया. आपकी कहानी ”जहां चाह, वहां राह” ने धूम मचा दी. इधर हमारा ब्लॉग तो सारा दिन आपके इर्द-गिर्द मंडराता रहा. कुलवंत जी हिंदी नहीं पढ़ सकतीं और आप बोल नहीं सकते, उनको लेख पढ़वाने का भी आपने बहुत बढ़िया तरीका निकाला. आपने कॉपी-पेस्ट करके मनजीत कौर को भेज दिया और मनजीत कौर ने फासला रखते हुए फोन पर आप दोनों को पढ़कर सुना दिया. हमने ब्रेकफास्ट में मीठी-मीठी सिवैयां खाईं, आहा, मीठी-मीठी! एक बार पुनः आपको जन्मदिन और विवाह की सालगिरह की हार्दिक बधाइयां और शुभकामनाएं.

लीला तिवानी

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

3 thoughts on “गुरमैल भाई द्वारा धन्यवाद-ज्ञापन

  1. प्रिय गुरमैल भाई जी, आपके लेखन की ज्योति यों ही जलती रहे और हमें प्रकाशमान करती रहे, यही हमारी शुभकामना है.

    1. बहुत बहुत धन्यवाद लीला बहन . आप पारस हैं और आप से मिल कर सोना नहीं बन सके , कुछ चमक तो आप से लेनी ही थी .

      1. प्रिय गुरमैल भाई जी, रचना पसंद करने, सार्थक व प्रोत्साहक प्रतिक्रिया करके उत्साहवर्द्धन के लिए आपका हार्दिक अभिनंदन. ब्लॉग का संज्ञान लेने, इतने त्वरित, सार्थक व हार्दिक कामेंट के लिए हृदय से शुक्रिया और धन्यवाद.

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