राजनीति

इंदिरा गांधी की फीकी रही थी जन्मशताब्दी !

कमला कौल की इंदु, शांतिनिकेतन की प्रियदर्शिनी, बापू की मानसपुत्री, जमाहिरलाल की जैविक पुत्री, १९७१ की लौह महिला, आपातकाल की महारानी, १६ वर्ष भारत की प्रधानमंत्री रही जीवित किंवदंती “इंदिरा नेहरू गाँधी” विवाद की भी साम्राज्ञी रही हैं । १९ नवम्बर को न केवल उनकी जन्म – जयंती है, अपितु जन्म – शताब्दी (१९ नवम्बर १९१७) भी है।
कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से ऐसी देवी को भावभीनी आदरनायें के साथ क्या यह सच्चाई है कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और इंदु व इंदिरा के पिता जवाहरलाल उन्हें भारतीय राजनीति में नहीं आना देना चाहते थे, क्योंकि पिता के जीतेजी इंदिरा MP तक बन नहीं पाई थी ? नेहरूजी के निधन के बाद ही जब शास्त्रीजी प्रधानमंत्री बने, तब उन्हें पहली दफ़ा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय सौंपकर देश की मुख्यधारा में लायी गयी थी और राज्यसभा को भेजी गई थी ! फिर शास्त्रीजी के आकस्मिक निधन के बाद वरेण्य केबिनेट मंत्री गुलज़ारीलाल नंदा को देश का कार्यवाहक प्रधानमंत्री पद सौंपा गया था, जो शास्त्रीजी के तेरहवीं तक रहे और तब इंदिरा पहली दफ़ा देश की प्रधानमंत्री बनी, तो अनवरत कार्यकाल और फिर १९७१ में पाकिस्तान को औकात बताते हुए पूर्वी पाकिस्तान को एक नए देश के रूप में ‘जयो बांग्ला’ व ‘बांग्लादेश’ बनाने में मुख्य किरदार निभाई और पश्चिमी पाकिस्तान (अब सिर्फ पाकिस्तान) के डेढ़ लाख से अधिक सैनिकों को सेनाध्यक्ष सहित बंदी बनाई, किन्तु उन्हें छोड़ दूरदर्शिता की परिचय भी दी।
इस वृंत के लिए ‘लौह महिला’ की खिताब पाई, इतना ही नहीं, अपनी अध्यक्षता में ‘भारत रत्न’ भी धारण कर ली, यहीं से ‘डिक्टेटर’ बनी यह कथित देवी माँ दुर्गा ने कांग्रेस के इतर राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं व धुर विरोधियों को येन केन प्रकारेन ‘केस’ और ‘कारागार’ की चौहद्दी में घसीटवाने लगीं, जो १९७५ के काला अध्याय ‘आपातकाल’ के रूप में परिणत हुई । विचार अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता खत्म, परंतु १९८० में पुनः देश की प्रधानमंत्री बन बहुमत की परचम लहराई।
सत्ता में पुरजोर बहुमत से खतरा भी है कि विपक्ष गूंगा न रह जाय ! आतंवादियों व अतिवादियों के लिए जरूरी ‘ऑपेरशन ब्लूस्टार’ का खामियाज़ा भी उन्हें भुगतनी पड़ी, जो कि १९८४ में  ‘शहीदी’ (शहादत) दर्ज़ा लिए उनकी अंत से हुई, जो भारत, भारतरत्न और प्रधानमंत्री पद के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है!

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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