इतिहास

असरदार पटेल !

देश के पहले गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्मदिन 31 अक्टूबर को प्रतिवर्ष हम राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाते हैं । देश को एकता में बाँधे रखने के लिए न चाहकर भी ‘डिक्टेटरशिप’ आवश्यक है!

पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने भारत विभाजन का ज़िम्मेदार सरदार पटेल को बता रहे हैं। क्या सरदार पटेल भारत के विभाजक थे ? मेकिंग इंडिया ऑनलाइन अखबार ने पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी की बातों को प्रकाशित किया है कि वे भारत विभाजन का ज़िम्मेदार सरदार पटेल को बता रहे हैं। स्वाभाविक ही समस्त हिन्दुओं को अपने प्रिय सरदार के खिलाफ माननीय हामिद मियां की यह बात बहुत बुरी लगी है और इसीलिए हिन्दुओं के मन में इस बात से मुस्लिमों के लिए कोई प्यार तो बढ़ेगा नहीं ! क्यों?

इससे भी बड़ी बात यह है कि मुस्लिम समाज में से कोई भी माननीय हामिद मियां की बात का विरोध नहीं करेंगे, बल्कि अधिकतर मुस्लिम लोग यही कहेंगे कि सचमुच सरदार पटेल ने ही विभाजन कराया होगा!
मुस्लिम समाज कभी भी मुस्लिम कट्टरपंथी सोच वालों का कोई विरोध नहीं करता, उल्टा हिन्दुओं को ही हर बात के लिए गलत बताते रहते हैं।

मुस्लिम समाज के नेताओं से कहना है, अगर हिन्दू गलत होता, तो आज भारत में मुस्लिमों की ज़िन्दगी वैसी ही भयानक होती, जैसी इस्लामिक देश पाकिस्तान में हिन्दुओं की है। हिन्दू न तो कट्टरपंथी है और न आपसे नफरत करता है ।  हां, आप अपने ऐसे भड़काऊ नेताओं का विरोध न करके हिन्दुओं को अपने से दूर ज़रूर कर रहे हो।

31 अक्टूबर भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण तिथि के रूप में दर्ज है । इसदिन देश के प्रथम गृह मंत्री व उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्मदिन है, तो इसी दिन प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की नृशंस हत्या उन्हीं के अंगरक्षकों ने कर दी थी । यह ब्लैक डेट भी इतिहास में काली अध्याय के रूप में जुड़ी है । जब हम पटेल के जन्मदिवस ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मना रहे हैं, तो एक अन्य प्रधानमंत्री की नृशंस हत्या को नजरअंदाज कर तो कतई नहीं मना पाएंगे । माना कि इंदिरा गाँधी ने आपातकाल लगा कर गलतियाँ की, किन्तु उनके हिस्से पाकिस्तान को सबक सिखाने की ‘आयरन लेडी’ वाली छवि भी तो है, जब लाहौर तक हमारी सेना पहुँच गयी थी । वे तो खालिस्तान के विरुद्ध अपने को बलिदान कर दी । हमें उनकी बलिदान दिवस को भी याद रखनी चाहिए।

भारत की जो हम अभी तस्वीर देख रहे हैं, उसे एकत्व में लाने के लिए इस सरदार (वल्लभभाई पटेल) ने असरदार कार्य किए थे, इसमें कोई दोराय नहीं है ! प्रेम से, पुलिसिया डंडे से और क्रूरता से भी उन्होंने देशी रियासतों को भारत में मिलाये । सरदार पटेल को ‘दण्ड’ कूटनीति के कारण ही उन्हें भारतीय राजनीति का ‘डिक्टेटर’ भी कहा जाता है ! उदण्ड बच्चों पर अंकुश लगाने के लिए परिवार में ‘पिता’ भी तो क्रूरतम हो जाते हैं, बावजूद सरदार पटेल की ‘एकता’ नीति को हम अनदेखे नहीं कर सकते ! हाँ, उसके कारण ही भारत का यह वर्त्तमानस्वरूप है ! गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बुक के 2020 संस्करण के पृष्ठ संख्या- 190-191 पर संसार के Tallest Statue के रूप में उनकी प्रतिमा को स्थान मिली है, जो उनकी जन्मभूमि गुजरात में बनी है, जिनकी वजन भी संसार में बनी सभी प्रतिमाओं में सर्वाधिक है ! हर मनुष्य को यह प्रतिमा देखनी चाहिए । उसे देखकर अवश्य लगेगा कि वे ‘लौह पुरुष’ थे, हैं, रहेंगे ! एक अभियान के बाद हालाँकि महिलाओं ने उन्हें पहलीबार ‘सरदार’ नामार्थ संबोधित किये थे, किन्तु वे सिर्फ सरदार ही नहीं, ‘असरदार’ भी थे, उनकी बातों से असर पड़ती थी यानी बातों में पुरजोर दम था।

अंतरिक्ष से भी दिखाई पड़ते हैं ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ !
सरदार पटेल को तो नहीं देखा, किन्तु उनकी प्रतिमा ने सम्पूर्ण विश्व में हम भारतीयों को ऊँचा कद प्रदान किया । अंतरिक्ष से भी सरदार पटेल की उक्त प्रतिमा दिखाई पड़ रहै है । क्या हम इसपर गर्व नहीं करें ! हम नकारात्मक मत ही सोचें ! हम समुन्नत क्यों नहीं सोचते हैं ? ‘ताज़महल’ जब बना था ! सुना है, कारीगरों के हाथ काट दिए गए थे और 20,000 से अधिक मजदूरों को बेगार खटाया गया था, तो ताज़महल को ध्वस्त कर दें क्या ? आज ‘ताज़महल’ पर्यटन से राजस्व दे रहा है, कल यह राजस्व विशाल मूरत भी देगा, धैर्य रखिये क्योंकि ‘स्टैंच्यू ऑफ यूनिटी’ को बनने में जितने रुपये खर्च हुए, उनमें 250 इंजीनियर्स, 3000 मजदूरों को रोजगार मिला और आगे देश-विदेश के लोग यहाँ घूमने आयेंगे जिससे वे भारतीय परंपरा, यूनिटी और इतिहास के बारे में बहुत कुछ  जान पायेंगे!

तिथि 31 अक्टूबर है आह्लादसारी और प्रलयंकारी तिथि !
वर्ष 1875 का 31 अक्टूबर को वल्लभ भाई पटेल का जन्म हुआ, गाँधीजी के चंपारण कृषक सत्याग्रह के प्रसंगश: बारदोली में कृषक सत्याग्रह का नेतृत्व पटेल ने किया था । चूंकि इस आंदोलन में महिला कृषकों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा ली थी और पटेल के करिश्माई नेतृत्व ने इन महिलाओं को काफी प्रभावित की । महिला कृषकों ने उन्हें तब से ‘सरदार’ कहना शुरू कर दी । कालान्तर में यह शब्द नामोपसर्ग में लगकर सरदार वल्लभ भाई पटेल के रूप में संसारख्यात् हो गए । इतना ही नहीं, वकालत में बहस के समय पत्नी के निधन का तार मिलने पर भी वे बहस करते रहे और उक्त केस जीते । भारत को आज़ादी मिळते ही देश ने इसे अपना पहला गृह मंत्री बनाया और अपने व्यक्तित्व संग कृतित्व के बूते सप्ताह से कम दिनों के अंदर ही देश ने उन्हें उप-प्रधानमंत्री भी बना दिया । तब भारत में सैकड़ों की संख्या में छोटे-छोटे देशी राजे-रजवाड़े का बिखराव, बड़े रियासतों में हैदराबाद के निज़ाम, ज़ूनागढ़ रियासत, कश्मीर के महाराजा इत्यादि के भारत के प्रति पूर्ण समर्पण का अभाव से सरदार पटेल को लगा …. अंग्रेजों ने ‘फूट’ डालने का जो मन्त्र-जाप किया था, वो अब भी जारी है । सरदार की सरदाई ने कड़ाई से पालन किया और कश्मीर को छोड़कर तब के ज्ञात हिस्से भारत के एकता के सूत्र में बँधे, फिर इस सरदार का उपनाम ‘लौह-पुरुष’ हो गया। कालान्तर में कश्मीर,गोवा, सिक्किम इत्यादि रियासत अथवा प्रांत भी भारत के क्षेत्रफल के हिस्से बने , जो कि सरदार पटेल के ही दूरदर्शिता के प्रमाण हैं और भारत सरकार इसलिए अपने विरोधियों के लिए भी प्रातःस्मरणीय रहे ऐसे भारतीय लौहे के जन्मदिवस के सुअवसर पर ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाते हैं । तिथि 31.10.2018 को सरदार पटेल के विश्व की ऊंची प्रतिमा का गुजरात के नर्मदा ज़िले में लोकार्पित भी हो रहा है । आधुनिक भारत के निर्माता, जो IAS, IPS और आधुनिक भारतीय पुलिस के जनक भी रहे।

भारतीय एकता के सूत्रधार थे सरदार पटेल।

वर्ष 1875 का 31 अक्टूबर को वल्लभ भाई पटेल का जन्म हुआ, गाँधीजी के चंपारण कृषक सत्याग्रह के प्रसंगश: बारदोली में कृषक सत्याग्रह का नेतृत्व पटेल ने किया था । चूंकि इस आंदोलन में महिला कृषकों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा ली थी और पटेल के करिश्माई नेतृत्व ने इन महिलाओं को काफी प्रभावित की । महिला कृषकों ने उन्हें तब से ‘सरदार’ कहना शुरू कर दी । कालान्तर में यह शब्द नामोपसर्ग में लगकर सरदार वल्लभ भाई पटेल के रूप में संसारख्यात् हो गए । इतना ही नहीं, वकालत में बहस के समय पत्नी के निधन का तार मिलने पर भी वे बहस करते रहे और उक्त केस जीते । भारत को आज़ादी मिळते ही देश ने इसे अपना पहला गृह मंत्री बनाया और अपने व्यक्तित्व संग कृतित्व के बूते सप्ताह से कम दिनों के अंदर ही देश ने उन्हें उप-प्रधानमंत्री भी बना दिया । तब भारत में सैकड़ों की संख्या में छोटे-छोटे देशी राजे-रजवाड़े का बिखराव, बड़े रियासतों में हैदराबाद के निज़ाम, ज़ूनागढ़ रियासत, कश्मीर के महाराजा इत्यादि के भारत के प्रति पूर्ण समर्पण का अभाव से सरदार पटेल को लगा …. अंग्रेजों ने ‘फूट’ डालने का जो मन्त्र-जाप किया था, वो अब भी जारी है । सरदार की सरदाई ने कड़ाई से पालन किया और कश्मीर को छोड़कर तब के ज्ञात हिस्से भारत के एकता के सूत्र में बँधे, फिर इस सरदार का उपनाम ‘लौह-पुरुष’ हो गया। कालान्तर में कश्मीर, गोवा, सिक्किम इत्यादि रियासत अथवा प्रांत भी भारत के क्षेत्रफल के हिस्से बने , जो कि सरदार पटेल के ही दूरदर्शिता के प्रमाण हैं और भारत सरकार इसलिए अपने विरोधियों के लिए भी प्रातःस्मरणीय रहे ऐसे भारतीय लौहे के जन्मदिवस के सुअवसर पर ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाते हैं।

इस इस्पाती जीवट को मेरा अविराम प्रणाम….

डॉ. सदानंद पॉल

एम.ए. (त्रय), नेट उत्तीर्ण (यूजीसी), जे.आर.एफ. (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), विद्यावाचस्पति (विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर), अमेरिकन मैथमेटिकल सोसाइटी के प्रशंसित पत्र प्राप्तकर्त्ता. गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स इत्यादि में वर्ल्ड/नेशनल 300+ रिकॉर्ड्स दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 12,000+ रचनाएँ और संपादक के नाम पत्र प्रकाशित. गणित पहेली- सदानंदकु सुडोकु, अटकू, KP10, अभाज्य संख्याओं के सटीक सूत्र इत्यादि के अन्वेषक, भारत के सबसे युवा समाचार पत्र संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में अर्हताधारक, पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.