मुक्तक/दोहा

1)

तूँ प्यार से मेरा सर जो सहलाती नहीं है ।
तेरे तस्वीर की माला मुझे सुहाती नहीं है ।।
2)
तेरे वह नेह का आंचल नहीं पूचकरता मुझको ।
तेरा वह दूर जाना क्यों नहीं दुत्कार था मुझको ।।
“दीपक्रांति”

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