आत्मकथा

सारिका भाटिया की कहानी – 4

(11) क्लास 11 का परिणाम बहुत अच्छा रहा

जब क्लास 11 में परिणाम आना था तो मुझे उम्मीद नहीं थी इतना अच्छे मार्क्स होंगे। मैं खुश थी। उस वक्त मेरे में आत्मविश्वास बन गया था। मेरी मां अपने घर में मंदिर में भजन बोलती थी। उससे मुझे लगाव था। बोलने में मेरे सुधार हुआ था, पर उतना नहीं, क्योंकि शब्दों का उच्चारण सही नहीं था। मेरी मां मुझे रोज एक बुक से पढ़वाकर सुनती थी और गलती में सुधार करती थी। साथ में मां के भजन गाना शुरू कर दिया था। आज भी खाली समय में भजन गाती हूं। ये मुझे पसंद है। मेरी आवाज मीठी सुरीली बनने लगी है। हनुमान जी की कृपा से हनुमान चालीसा सारा याद है। हनुमान चालीसा पाठ अपने आप कर लेती हूं।

(12) क्लास 12 की पढ़ाई और परिणाम

12 क्लास में आर्ट्स विषय लिया हुआ था। थोड़ा मुश्किल लग रहा था, क्योंकि बोर्ड था। भाभी से बात करती थी और अच्छे मार्क्स बताया और धन्यवाद किया। फिर उनको मन की बात बतायी। उन्होंने मशीन का पूछा था। उन्होंने कहा- दोनों लगाओ। फिर मैंने दोनों लगायी थी। उनकी बात मान ली। मुझे टीवी, चिड़िया सब जगह आवाज अच्छी लग रही थी। यहां तक कि एक बार तो क्लास में एक हिंदी पढ़कर सुनाया था। उसमें टीचर और बच्चों ने ताली बजायी। स्कूल में जो टीचर की बात समझ आती थी उसको घर आकर नोट्स बनाती थी। पढ़ाई में मेहनत कर रही थी। जब 12 बोर्ड परिणाम आया तो 11 क्लास से भी बेहतर मार्क्स आये। जोकि मेरे मम्मी पापा खुश थे और स्कूल की टीचर भी खुश थी और हैरान भी थे। जो मैंने सोचा नहीं था। सबसे ज्यादा राजनीति विज्ञान में आये थे जो भाभी के सामने चंडीगढ़ ले गयी थी। फिर मैंने मुड़कर नहीं देखा। मेरा आत्मविश्वास बढ़ा।

(13) पहली बार प्रतियोगिता में तृतीय पुरस्कार

उस वक्त क्लास 12 में मेरा आर्ट्स विषय में होम साइंस भी था। उसमें मेरा एंकर स्टिच किट प्रतियोगिता थी। उसमें मुझे तृतीय पुरस्कार मिला। ये मेरा स्कूल में पहला पुरस्कार था। मैं तब तक कोई भी प्रतियोगिता कभी नहीं जीती थी। मुझे याद है इसमें क्लास 12 की लड़कियों ने चालाकी की थी। हुआ ये था कि हमारी होम साइंस टीचर ने प्रतियोगिता में बहुत सारे किट में से कोई एक किट चुनने को कहा था, जो हमारे सामने रखे थे। और घर से स्टिच करके लाना था। पर जो किट मुझे पसंद था, वो मेरी सहेली ने चालाकी से ले लिया। सूरज स्माइल किट मुझे मिला था, तो मैं उदास थी। मेरी मां ने कहा- कोई बात नहीं। ये भी सुंदर है। कहते हैं भगवान सब देखता है। जब मुझे तृतीय पुरस्कार मिला, तो मुझे बहुत हैरानी हुई। क्योंकि बहुत अच्छा स्टिच किया हुआ था। ये नानी की प्रेरणा है, जो उन्होंने मुझे सिलाई कढ़ाई सिखाया था।

जो मुझे किट्स पुरस्कार मिला था वो सुंदर था। होम किट थी। आज भी मेरा पास पड़ा हुआ है। दीवार में लगाया है। ये छोटे किट्स थे। फिर क्लास 12 की परीक्षा देने के बाद जो छुट्टियाँ थीं उसमें बडी ‘जय माता दी’ स्टिच किट बनाया, जो संभालकर आज भी दीवार में लगाया हुआ है।

(14) कोलेज में दाखिला

क्लास 12 में अच्छे मार्क्स के कारण कालेज में दाखिला हुआ। बीए ऑनर्स में राजनीति विज्ञान विषय लिया मैत्रेयी काॅलेज में। मुझे ये विषय पसंद नहीं था, पर लेना पड़ा, क्योंकि क्लास 12 में मार्क्स इसमें ज्यादा आये थे। पापा को बोलती थी- राजनीति पसंद नहीं है मुझे। पापा ने कहा जरूरी नहीं कि राजनीति के लिए जाना, समाज सेवा में भी सहयोग मिल सकता है। मुझे विषय लेना पड़ा।

लेकिन मेरे बड़े भैया मुझे कहते थे- बिगड़ जायेगी। लेकिन उनको कहा- नहीं, मैं इस तरह से नहीं हूं। कालेज में सुना जाता था कि लड़कियां बिगड़ जाती हैं, पढ़ती नहीं हैं। पर मैं तो आदर्श सरकारी अनुशासन में रही। बस पढ़ाई करती थी। लड़कियों ने जो मेरी सहेली थीं, मुझसे कहा- चलो घूमने पिक्चर देखने, पर मैंने मना कर दिया था। लेकिन मेरे कालेज में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भाषण में भाग लिया था। पर ये मेरे लिए नया था, क्योंकि मैनै स्कूल में कभी भाग नहीं लिया था। पर इसमें घबरा रही थी, क्योंकि क्लास में पढ़कर बोलना था। कालेज में अनेक लोगो के समाने बोलना था। ये मेरा पहला भाषण था। विषय था आतंकवाद पर। क्योंकि मुझे याद उस वक्त आतंकवाद देश में नया संकट बना हुआ था। पर मंै इसके लिए घर में अभ्यास करती थी। शीशा के सामने भाषण बोलती थी। और मां के सामने बोलना था। लेकिन मुश्किल ये था कि पेपर से नहीं सुनाना था। जो मैंने लिखा था वो बिना पढ़े सुना था। इसके लिए काफी मेहनत की। ये प्रतियोगिता थी। माइक मेरे लिए नया था। पहले कभी हाथ नहीं लगाया था।

मैं जीत नहीं सकी, पर ये मेरा यादगार पल था, क्योंकि बिना देखे बोलना था। इस आतंकवाद के विषय में कुछ लाइन लोगों को अच्छी लगी थीं। उस पर लोगों ने ताली बजायी थी। इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा।

(15) एम.ए. (राजनीति विज्ञान) में प्रवेश

बीए ऑनर्स में राजनीति विज्ञान में अच्छे मार्क्स आने के कारण से एम.ए. (राजनीति विज्ञान) में प्रवेश हुआ। उसके बाद मेरे पढ़ाई में अच्छे मार्क्स के कारण से आत्मविश्वास बना रहा।

(16) 2004 में पहली समाज सेवा

एम.ए. (राजनीति विज्ञान) आखिरी परीक्षा का परिणाम आना बाकी था। मैं बोर रही थी। मेरी मां ने बताया कि मयूर विहार में नया उद्यान केयर खुला है। 1998 में मैंने अपने जन्मदिन पर बच्चों को सेव बांटे थे। मेरे लिए यह सौभाग्य था। इन बच्चों को देखकर मेरे मन में दया भावना आई। ये तब की बात है जब मैं क्लास 12 में थी। लेकिन इन बच्चों को पढ़ाना तो एम.ए. की आखिरी परीक्षा के बाद किया था। जब परीक्षा का परिणाम आना बाकी था।
अप्रैल में परीक्षा देने के बाद मैंने वहाँ बच्चों को पढ़ाया। एक तरह से मुझे अनुभव भी मिला। ये मेरा पहला पढ़ाने का कार्य रहा। पहले कभी पढ़ाया नहीं था। मेरे मन में घबराहट भी थी कि पढ़ा भी पाऊंगी या नहीं। लेकिन मेरा काम आसान हो गया था, क्योंकि मां ने बी.एड. की हुई थी। उन्होंने समझाया। स्कूल मे भी टीचर को देखती थी। चाहे मैंने टीचर का कोर्स नहीं किया हो। उद्यान केयर का भी सहयोग रहा।

(17) 2005 के बाद

2001 में बडे भैया की शादी हुई थी। उस कालेज बी.ए. (आॅनर्स) फाइनल था। उसके बाद एम.ए. किया था। फिर उद्यान केयर में तीन साल पढ़ाया था। मुझे ये समाज सेवा बहुत पसंद आयी थी। अपने भैया को बोला था कि समाज सेवा का कोर्स होता है या नहीं। उन्होंने कहा समाज सेवा का काम आसान नहीं है। कोर्स करने से पहले अपने मन में समाज सेवा के लिए सोच आना चाहिए। उनकी बात समझ नहीं आई। लेकिन ये व्यावहारिक समझ आयेगा। स्कूल से बाहर निकलकर मैं नयी दुनिया को समझ रही थी। बस पढ़ाई के साथ ज्ञान देता है। असली बाहरी दुनिया को समझने में देर लगी। इस बीच मेरे मां बाप मेरा लिए शादी के लिए लड़का देख रहे थे। पंडित से बात करती थी मां। पंडित बोलते थे आप मत ढूँढो, अपने आप आयेगा।
लेकिन ये समाज परिवार हमारी सोचकर परेशान करते हैं- लड़की परायी होती है और उम्र भी बढ़ रही थी। मेरी मां ने पता किया पंडित से कि मंगली हूं। लेकिन मां बाप ढूंढ रहे थे लड़का। मेरी मां बताती थी कि मेरे दादाजी कभी बुआ के लिए लड़का नहीं ढूँढते थे। अपने आप आये सब। मेरी बड़ी बुआ के पति यानी फूफा जी के तीन दोस्तों ने मेरी बाकी तीन बुआओं को पसंद किया। छोटी बुआ को मैथ्स का गोल्ड मैडल भारत सरकार से मिला हुआ था।
काफी लड़कों ने मना किया था मेरे लिए क्योंकि मुझे कान की परेशानी है। मां बाप ने कहा था बोल सकती है। मेरे मां-बाप निराश हुए। हम अपने गुरु के पास गये पटेल नगर। उनके संगत में एक आंटी थी, उनकी भाभी के बेटे से रिश्ता कराया था। जिस दिन सगाई थी, उसने मेरे गुरू से आशीर्वाद लिया। गुरुजी ने कहा- उस लड़की के लिए तैयार हैं ना? उसको दर्द मत देना। उसने कहा- ठीक है। सगाई हो गई थी, लेकिन टुट गई थी।
हुआ ये कि सगाई के अगले दिन सुबह अपने होने वाले पति से बात की। हम आपस में बात कर रहे थे। अचानक से फोन में बातें मेरी अच्छी नहीं लगीं क्योंकि वो जल्दी जल्दी बोल रहा था। मैं धीरे धीरे बोल रही थी। पर उसने मेरी कमी नहीं बतायी। दो दिन फोन नहीं आया। फिर एक दिन उसकी मां का फोन आया मेरे पापा के पास। बोले कि आप घर आये, कुछ बात करनी है आपसे। मेरे मां बाप चिंता में थे कि क्या हुआ।
जब मेरे मां बाप उनके घर गये, तो जिससे शादी होनी थी उसने मेरे मां बाप को मेरे बारे में सौ कमी निकाल दीं। बोले- आपकी बेटी से शादी नहीं करनी। लेकिन मेरे पापा ने उनको दस बातें बोल दीं, जबाब दिया, उसकी कमी निकाल दीं। मेरे मम्मी पापा जब घर आ रहे थे तो रो रहे थे। उन्होंने मेरे छोटे भैया को रास्ते में घर में फोन किया था कि सारिका को कुछ मत बताना, उसका ध्यान रखना।
जब घर आये तो मम्मी पापा ने अपनी उदासी छुपा रखी थी। मैं समझ गयी थी कि कुछ बात है। मैंने छोटे भैया से पुछा क्या बात हो गई। क्योंकि मम्मी पापा में मुझे सच बताने की हिम्मत नहीं थी। उन्होंने भैया को कहा कि तुम बता दो। भैया ने सब सच बताया, तो मैं खूब रोयी और उदास थी।

परिचय - सारिका भाटिया

जन्म तिथि-08/11/1980 जन्म स्थान- दिल्ली पिता का नाम- late भोज राज भाटिय़ा मां का नाम- नीलम भाटिया भाई- दो भाई शैक्षणिक योग्यता- (1) बीए (ऑनर्स) राजनीति विज्ञान दिल्ली यूनिवर्सिटी मैत्रेयी कॉलेज 2002 (2) एम ए (राजनीति विज्ञान) दिल्ली यूनिवर्सिटी दौलत राम कॉलेज 2004 (3) Bachelor of Library and Information Science (BLIS) IGNOU 2005 (4) Cerficate in Computing IGNOU 2006 (5) Primary teachers Training course 2013 Delhi अनुभव- (1) Teacher ( Udayan Care (NGO) 2004, 3 साल काम किया। (2) Insurance agent Hdfc 2005 -2007 (3) Daycare day boarding teacher Eurokids playschool Delhi Mayur vihar delhi 2010- 2013 वर्तमान में- 1) उपप्रधान (बाह्य), विकलांग बल 2) अध्यापिका, (गरीब बच्चों को पढाना), निर्भेद फाउंडेशन गाजियाबाद ईमेल - sarika1980@gmail.com रुचियाँ - (1) पढ़ना, (2) बच्चों को पढ़ाना, (3) गाना, आध्यात्मिक संगीत सुनना, (4) समाज सेवा (5) ड्राइंग पेंटिंग, anchor stitch kits,art and craft , (6) सकारात्मक विचार (positive thought) पढ़ना।

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