शिशुगीत

हिरन

कहानी उस हिरण की, जिसका राम के जन्म ...

मैं जंगल का रहने वाला,
खूब सजीला मेरा रूप,
सोने जैसा रंग मिला है,
ज्यों बादल में खिलती धूप.
खूब तेज है मेरी चाल,
शाकाहारी पंडित हूं,
शेर देखकर भरूं चौकड़ी,
मानो कोई दंडित हूं.