शिशुगीत

डॉक्टर

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छोटा-सा आला दिलवादे,
कोट श्वेत भी मां सिलवादे,
डॉक्टर बनना है मां मुझको,
कैसे बनूं जुगत बतलादे.
डॉक्टर बनकर मैं लोगों की,
सेवा तन-मन से कर पाऊं,
ऐसी आशीष देना हे मां,
मानवता की मिसाल बन जाऊं.
(विश्व पारिवारिक डॉक्टर दिवस 19 मई पर विशेष)

— लीला तिवानी

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

3 thoughts on “डॉक्टर

  1. कविता अच्छी लगी। स्वामी रामदेव तथा आचार्य बालकृष्ण जी अंग्रेजी चिकित्सा के डाक्टर नहंी हैं परन्तु अनेक डाक्टरों से अधिक काम कर रहे हैं। हम भी डाक्टर बन सकते हैं। सफेद कोट और बिना आले के भी डाक्टर बना जा सकता है। हमारे प्राचीन चिकित्सक वैद्य कहलाते थे और असाध्य लोगों का भी सटीक उपचार करते थे। आजकल की चिकित्सा तो रोगों को दबाती है। ठीक नहीं करती। सारी जिन्दमी डाक्टरों का दास बन कर रहना पड़ता है। सादर नमस्ते एवं धन्यवाद जी।

  2. कविता अच्छी लगी। स्वामी रामदेव तथा आचार्य बालकृष्ण जी अंग्रेजी चिकित्सा के डाक्टर नहंी हैं परन्तु अनेक डाक्टरों से अधिक काम कर रहे हैं। हम भी डाक्टर बन सकते हैं। सफेद कोट और बिना आले के भी डाक्टर बना जा सकता है। हमारे प्राचीन चिकित्सक वैद्य कहलाते थे और असाध्य लोगों का भी सटीक उपचार करते थे। आजकल की चिकित्सा तो रोगों को दबाती है। ठीक नहीं करती। सारी जिन्दमी डाक्टरों का दास बन कर रहना पड़ता है।

    1. प्रिय मनमोहन भाई जी, रचना पसंद करने, सार्थक व प्रोत्साहक प्रतिक्रिया करके उत्साहवर्द्धन के लिए आपका हार्दिक अभिनंदन. आपके सुझाव से हम सहमत हैं. बाकी शिशुगीत 4-5 साल के बच्चों के लिए होता है. उस समय बच्चों के जेहन में डॉक्टर की यही छवि होती है. एक बार पुनः रचना पसंद करने, सार्थक व प्रोत्साहक प्रतिक्रिया करके उत्साहवर्द्धन के लिए आपका हार्दिक अभिनंदन.

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