कविता

रोजगार

“रोजगार” इक अंगार,
जिसमें दिन-रात,
मैं जलता हूँ।
कभी खुली,
तो कभी छिपी,
बेरोजगारी में मैं पलता हूँ।
“रोजगार” इक मंझधार,
जिसमें न डूबा,
औ न उतराना हूँ।
कभी तंगी,
तो कभी मंदी,
के जंजाल में मैं फंसता हूँ।
“रोजगार” इक उपचार,
है हर समस्या का समाधान।
परन्तु बेरोजगारी के इस दौर में,
कभी ये मुझको,
तो कभी मैं इसको,
नहीं फलता हूँ।
रोजगार की अंधी दौड़ में,
मैं अपने सपनों मूल्यों ज़रूरतों को,
तह बनाके कोने में रखता हूँ।
“रोजगार” इक माँग,
दिन-रात उसी के अनुसार बस ढलता हूँ…
— ज्योति अग्निहोत्री ‘नित्या’

परिचय - ज्योति अग्निहोत्री

माता का नाम: श्रीमती अशोक कुमारी चौबे पिता का नाम:श्री एम. लाल चौबे पति का नाम:श्री धीरज अग्निहोत्री स्थाई पता: श्री हरिविष्णुपुरम, महेरा फाटक इटावा, उत्तर प्रदेश फ़ोन नम्बर:8439671659; 9219116003 जन्म तिथि:14 जुलाई 1979 शिक्षा: बी. ए. (प्रतिष्ठा)इतिहास, मैत्रेयी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, .एम. ए.(हिन्दी),चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय बी. एड., डॉ. भीमरावअम्बेडकर विश्वविद्यालय पी. जी. डिप्लोमा अनुवाद (हिन्दी-अंग्रेज़ीऔर अंग्रेज़ी-हिन्दी), नॉर्थ कैम्पस, दिल्ली विश्वविद्यालय व्यवसाय: शिक्षक, सहायक अध्यापक, बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश प्रकाशन विवरण: ऑनलाइन प्रकाशन:स्टोरी मिरर-39 कविताएं; प्रतिलिपि-13 कविताएं एवं 3 लघुकथा साहित्यिक पत्रिका नारी शक्ति सागर: में "भीष्म नहीं तुम कृष्ण बनो" माही संदेश पत्रिका, जयपुर, राजस्थान ;हम हिन्दुस्तानी न्यूयॉर्क अमेरिका से प्रकाशित साप्ताहिक पत्र; घूँघट की बगावत, गोरखपुर से प्रकाशित साप्ताहिक पत्र आदि में कई कविताएं प्रकाशित।

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