गीत/नवगीत

ध्वज तिरंगा हाथ लेकर इक हवा फिर से चलेगी

सिंधु गंगा संग यमुना
धार पय रस की बहेगी
ध्वज तिरंगा हाथ लेकर
इक हवा फिर से चलेगी

पुत्र भारत के प्रतापी
मानना जग को पड़ेगा
हों सहस्रों मुश्किलें पर
झूठ से अब सच लड़ेगा
सभ्यता संस्कार वाली
इस धरा पर अब पलेगी
ध्वज तिरंगा हाथ लेकर
इक हवा फिर से चलेगी

हरित दूर्वा रक्त किसलय
इस धरा पर अब सजेगी
हिंद के बेटे चलेंगे
दुंदुभी नभ में बजेगी
दानवी संस्कार पापी
शोक विपदा अब टलेगी
ध्वज तिरंगा हाथ लेकर
इक हवा फिर से चलेगी

लहर सरिता अग्नि में भी
नाव लेकर अब बढ़ेगा
जानले अब ये जमाना
केसरी सूरज चढ़ेगा
पाप को मिलकर पछाड़ो
रात काली ये ढलेगी
ध्वज तिरंगा हाथ लेकर
इक हवा फिर से चलेगी

छोड़ मन की हीनता को
झूठ से तू कब डरा है
अंश तुझ में राम वाला
वीर रस तुझ में भरा है
सिंधु को जो बाँध लेती
राम की सेना चलेगी
ध्वज तिरंगा हाथ लेकर
इक हवा फिर से चलेगी

दूर हो संस्कार से निज
आधुनिकता क्यों फबेगा?
पूर्व से पश्चिम चलेगा
जान ले तब तू डुबेगा
लौट आ पूरब दिशा में
भोर की लाली खिलेगी
ध्वज तिरंगा हाथ लेकर
इक हवा फिर से चलेगी

परिचय - अनंत पुरोहित 'अनंत'

*पिता* ~ श्री बी आर पुरोहित *माता* ~ श्रीमती जाह्नवी पुरोहित *जन्म व जन्मस्थान* ~ 28.07.1981 ग्रा खटखटी, पोस्ट बसना जि. महासमुंद (छ.ग.) - 493554 *शिक्षा* ~ बीई (मैकेनिकल) *संप्रति* ~ जनरल मैनेजर (पाॅवर प्लांट, ड्रोलिया इलेक्ट्रोस्टील्स प्रा लि) *लेखन विधा* ~ कहानी, नवगीत, हाइकु, आलेख, छंद *प्रकाशित पुस्तकें* ~ 'ये कुण्डलियाँ बोलती हैं' (साझा कुण्डलियाँ संग्रह) *प्राप्त सम्मान* ~ नवीन कदम की ओर से श्रेष्ठ लघुकथा का सम्मान *संपर्क सूत्र* ~ 8602374011, 7999190954 anant28in@gmail.com

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