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गिनीज रिकॉर्ड्स होल्डर “सदानंद पॉल” ने संसार का सबसे बड़ा हस्तनिर्मित सुडोकु ‘सदानंदकु’ बनाया

कटिहार, बिहार के रहनेवाले सदानंद पॉल ने संसार का सबसे बड़ा हस्तनिर्मित व हैंडमेड सुडोकु बनाया है, जिसे उन्होंने 'सदानंदकु' नाम दिया है। इसे इंटरनेशनल रिकॉर्ड के रूप में बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से मान्यता भी मिल गयी। यह लॉकडाउन अवधि का सदुपयोग है। प्राय: लोग लॉकडाउन में कोरोना कहर को लेकर चिंतित रहे और कई तो अवसाद में भी चले गए, किन्तु सदानंद पॉल ने ऐसी आपदा की घड़ी को अवसर में बदल डाले और लॉकडाउन में घर में अनवरत रहने को अवसर में ढालकर 81 अंकों के वृहद सुडोकु बना डाले, जो एक मनुष्य द्वारा कलम से पेपर पर बनाई गई संसार की सबसे बड़ी मानवनिर्मित सुडोकु है, जिसे उन्होंने आविष्कारक यानी स्वयं के नामानुकूल 'सदानंदकु' नाम दिया है। ध्यातव्य है, सुडोकु एक गणितीय विधा है, जो जापान से निकलकर संपूर्ण संसार में फैली अनोखी गणितीय पहेली है, किंतु यह गणितीय पहेली सबसे पहले 1970 में न्यूयॉर्क में प्रकशित हुई थी, भारत के कई अखबारों ने भी इसके प्रकाशन में दिलचस्पी दिखा रही है। अब तो इस गणितीय पहेली की वास्तविक उम्र 50 वर्ष हो गयी है और यह वर्ष 2020 तो सुडोकु निर्माण का स्वर्ण जयंती वर्ष है। सुडोकु मूलत: जापानी शब्द है, जिनका अर्थ 'अकेला अंक' होता है। सूडोकु सिर्फ 9 अंकों की क्षैतिज और उदग्र वर्गाकृति लिए होती है, किंतु लॉकडाउन अवधि में आपदा को अवसर में ढालकर सदानंद पॉल ने 81 अंकों के हस्तलिखित वृहद सुडोकु यानी सदानंदकु बना डाले। सनद रहे, हिंदी व्याख्याता डॉ. सदानंद पॉल तीन विषयों में एम ए और मानद डॉक्टरेट हैं, यूजीसी नेट उत्तीर्ण और संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार से जे आर एफ हैं । वर्ल्ड रिकॉर्ड्स लिए उनका नाम गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है, तो मानव शृंखला में सर्वाधिक मैसेज भेजने सहित 8 बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में, 2 बार इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में, आरएचआर यूके में 10 रिकॉर्ड्स, तेलुगु बुक ऑफ रिकार्ड्स में 50 से अधिक रिकॉर्ड्स, तो बिहार बुक ऑफ रिकार्ड्स में 200 से अधिक रिकॉर्ड्स दर्ज हैं । राष्ट्रपति के हाथों कविता के क्षेत्र में नेशनल अवार्ड भी उन्हें प्राप्त है । उनकी तीन पुस्तकें, यथा- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन प्रकाशित हैं, तो इस लॉकडाउन अवधि में ही 2,000 से अधिक रचनाएँ विविध वेबसाइट में प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें अभाज्य संख्या से अभाज्य संख्या निकालने के कोरोनाइट सूत्र, गोरैया पक्षी पर रिसर्च आदि शामिल हैं । साप्ताहिक आमख्याल का संपादन करनेवाले सदानंद पॉल सबसे युवा समाचार पत्र संपादक रहे हैं, तो 500 से अधिक सरकारी स्तर की परीक्षाएं क्वालीफाई भी किए हैं । पद्म अवार्ड के लिए 14 बार नामांकित हो चुके हैं, तो 22,000 से अधिक आरटीआई आवेदनों को भेजने को लेकर वेबसाइट मैसेंजर ऑफ आर्ट में जगह मिली है, वहीं मैकिंग इंडिया ऑनलाइन अखबार ने उन्हें मिस्टर एनसाइक्लोपीडिया कहा है । कई उपलब्धियों को यूट्यूब चैनल में जगह मिली है। इसके साथ ही सदानंद पॉल के परिवार के सभी सदस्यों के नाम 3 दर्जन से अधिक रिकॉर्ड्स लिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हैं। मनिहारी क्षेत्र के बुद्धिजीवियों, उनके परिजनों और विद्यालय परिवार ने उनकी इस उपलब्धि 'सदानंदकु सुडोकु' को अद्भुत, ज्ञानवर्द्धक और गौरवान्वित करनेवाला बताए हैं।
सदानंदकु सुडोकु

कटिहार, बिहार के रहनेवाले सदानंद पॉल ने संसार का सबसे बड़ा हस्तनिर्मित व हैंडमेड सुडोकु बनाया है, जिसे उन्होंने ‘सदानंदकु’ नाम दिया है। इसे इंटरनेशनल रिकॉर्ड के रूप में बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से मान्यता भी मिल गयी। यह लॉकडाउन अवधि का सदुपयोग है। प्राय: लोग लॉकडाउन में कोरोना कहर को लेकर चिंतित रहे और कई तो अवसाद में भी चले गए, किन्तु सदानंद पॉल ने ऐसी आपदा की घड़ी को अवसर में बदल डाले और लॉकडाउन में घर में अनवरत रहने को अवसर में ढालकर 81 अंकों के वृहद सुडोकु बना डाले, जो एक मनुष्य द्वारा कलम से पेपर पर बनाई गई संसार की सबसे बड़ी मानवनिर्मित सुडोकु है, जिसे उन्होंने आविष्कारक यानी स्वयं के नामानुकूल ‘सदानंदकु’ नाम दिया है। ध्यातव्य है, सुडोकु एक गणितीय विधा है, जो जापान से निकलकर संपूर्ण संसार में फैली अनोखी गणितीय पहेली है, किंतु यह गणितीय पहेली सबसे पहले 1970 में न्यूयॉर्क में प्रकशित हुई थी, भारत के कई अखबारों ने भी इसके प्रकाशन में दिलचस्पी दिखा रही है। अब तो इस गणितीय पहेली की वास्तविक उम्र 50 वर्ष हो गयी है और यह वर्ष 2020 तो सुडोकु निर्माण का स्वर्ण जयंती वर्ष है। सुडोकु मूलत: जापानी शब्द है, जिनका अर्थ ‘अकेला अंक’ होता है। सूडोकु सिर्फ 9 अंकों की क्षैतिज और उदग्र वर्गाकृति लिए होती है, किंतु लॉकडाउन अवधि में आपदा को अवसर में ढालकर सदानंद पॉल ने 81 अंकों के हस्तलिखित वृहद सुडोकु यानी सदानंदकु बना डाले।

सनद रहे, हिंदी व्याख्याता डॉ. सदानंद पॉल तीन विषयों में एम ए और मानद डॉक्टरेट हैं, यूजीसी नेट उत्तीर्ण और संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार से जे आर एफ हैं । वर्ल्ड रिकॉर्ड्स लिए उनका नाम गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है, तो मानव शृंखला में सर्वाधिक मैसेज भेजने सहित 8 बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में, 2 बार इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में, आरएचआर यूके में 10 रिकॉर्ड्स, तेलुगु बुक ऑफ रिकार्ड्स में 50 से अधिक रिकॉर्ड्स, तो बिहार बुक ऑफ रिकार्ड्स में 200 से अधिक रिकॉर्ड्स दर्ज हैं । राष्ट्रपति के हाथों कविता के क्षेत्र में नेशनल अवार्ड भी उन्हें प्राप्त है । उनकी तीन पुस्तकें, यथा- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन प्रकाशित हैं, तो इस लॉकडाउन अवधि में ही 2,000 से अधिक रचनाएँ विविध वेबसाइट में प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें अभाज्य संख्या से अभाज्य संख्या निकालने के कोरोनाइट सूत्र, गोरैया पक्षी पर रिसर्च आदि शामिल हैं । साप्ताहिक आमख्याल का संपादन करनेवाले सदानंद पॉल सबसे युवा समाचार पत्र संपादक रहे हैं, तो 500 से अधिक सरकारी स्तर की परीक्षाएं क्वालीफाई भी किए हैं । पद्म अवार्ड के लिए 14 बार नामांकित हो चुके हैं, तो 22,000 से अधिक आरटीआई आवेदनों को भेजने को लेकर वेबसाइट मैसेंजर ऑफ आर्ट में जगह मिली है, वहीं मैकिंग इंडिया ऑनलाइन अखबार ने उन्हें मिस्टर एनसाइक्लोपीडिया कहा है । कई उपलब्धियों को यूट्यूब चैनल में जगह मिली है। इसके साथ ही सदानंद पॉल के परिवार के सभी सदस्यों के नाम 3 दर्जन से अधिक रिकॉर्ड्स लिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हैं। मनिहारी क्षेत्र के बुद्धिजीवियों, उनके परिजनों और विद्यालय परिवार ने उनकी इस उपलब्धि ‘सदानंदकु सुडोकु’ को अद्भुत, ज्ञानवर्द्धक और गौरवान्वित करनेवाला बताए हैं।

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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