शिशुगीत

कौआ

कौआ काला होता है,
कांव-कांव कर रोता है,
चोरी करना इसे सुहाता,
एक आंख का होता है.
एक दिवस मेरे घर आया,
मेरी रोटी ले भागा,
मैंने भी तब खूब चिढ़ाया,
”जा, जा, तू है काला कागा.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

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