गीत/नवगीत

तेरी चाहत दूरी है

तेरे बिन, मैं रहा अधूरा, प्रेमी संग तू पूरी है।
संग साथ की चाहत मेरी, तेरी चाहत दूरी है।
प्रेम का तूने, राग अलापा।
अकेलापन मुझको है व्यापा।
षडयंत्रों को पूरा करने,
कोर्ट में जाकर, किया स्यापा।
प्राणों पर आघात किया, फिर कहती मजबूरी है।
तेरे बिन, मैं रहा अधूरा, प्रेमी संग तू पूरी है।।
झूठ और छल करके, रानी।
तूने याद दिला दी, नानी।
मैंने तो विश्वास किया था,
विश्वासघात का, पिलाया पानी।
विश्वास कभी, पा न सकेगी, भले कानूनी सूरी है।
तेरे बिन, मैं रहा अधूरा, प्रेमी संग तू पूरी है।।
कहीं भी जाकर, अब तू लड़ ले।
किसी के ऊपर, जाकर चढ़ ले।
जीवन में ना, शांति मिलेगी,
कितनी भी, तू जिद पर अड़ ले।
तेरी चाहत पूरी हो बस, मेरी रही अधूरी है।
तेरे बिन, मैं रहा अधूरा, प्रेमी संग तू पूरी है।

— डाॅ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

santoshgaurrashtrapremi@gmail.com'

परिचय - डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, महेंद्रगंज, दक्षिण पश्चिम गारो पहाड़ियाँ, मेघालय-794106, ई-मेलः santoshgaurrashtrapremi@gmail.com, चलवार्ता 09996388169, rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in

Leave a Reply