बोधकथा

शादी की लिबास

एक देश की सच्ची कहानी है, उस देश की 25 वर्ष की मिस फु सूवै ने 87 वर्ष के दादा जी की इच्छा पूर्ण करने के लिए ‘शादी’ की लिबास सिलवाई तथा इसे पहन दादाजी के हाथ थामे चर्च गयी, हालांकि सूवै की शादी की इच्छा अब भी नहीं है । सूवै के माता – पिता वर्षों पहले तलाक ले चुके हैं और मिस सूवै अपने दादा जी के साथ ही रह रही है । दादा जी की इच्छा ‘पोती’ को दुल्हन लिबास में देखने की थी, क्योंकि वे दुनिया से कब अचानक कूच कर जाय ? सामान्यत:, उस देश मे इसतरह का रस्म ‘पिता’ निभाते हैं।

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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