कविता

सबला को सलाम

मार्च 2017 में प्रकाशित खबर

‘उदयपुर में चार बहुओं ने दिखाया

दशरथ मांझी जैसा दम’

पढ़कर लगा महिला ‘अबला’ नहीं ‘सबला’ है।

प्रत्येक महिला झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई है।

जिसतरह से गया जिला में अवस्थित

एक पहाड़ के बीचवाले हिस्से को काटकर

दशरथ मांझी ने नब्बे के दशक में रास्ता बनाये थे,

वैसी ही जुनून दिखाती हुई

राजस्थान के उदयपुर जिले के लांबाहल्दू गाँव की

बहू लाली सहित 4 महिलाएँ मिलकर

और छेनी- हथौड़े के साथ

40 फ़ीट गहरा और 20 फ़ीट चौड़ा कुँआ खोद डाली,

जिसे खोदने में 3 साल लगा।

ऐसी मजदूर महिलाओं के कारण

यह गाँव ‘जल- संरक्षण’ में आगे हो गया ।

ऐसी ज़ज़्बा को हमारी ओर से सलाम और प्रणाम ।

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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