इतिहास लेख

हिंदी फ़िल्म ‘फिल्लौरी’ के नायक की शहादत गाथा भी वह !

देश के ऐसे युवाओं को देश के प्रति ज़ज़्बा पैदा करने के लिए 13 अप्रैल 1919 की ऐतिहासिक व मर्मभेदी घटना को आत्मसात करने चाहिए । इस तारीख को यानी वैशाखी पर्व के दिन अमृतसर में जलियांवाला बाग में रॉलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी ।

इस सभा में युवाओं की फ़ौज, बूढ़े और महिलाएं मौजूद थीं, लेकिन इस बाग़ से निकलने का एक ही रास्ता था । इस सभा को भंग करने के लिए अंग्रेज अफसर जनरल डायर ने बिना किसी सूचना के अंधाधुंध गोलियां चलवा दी, चूँकि रास्ता एक ही था बाहर निकलने के लिए और वह भी संकरा ।

इसलिए लोग भागने लगे और सभा में मार्मिक भगदड़ होने लगी। फायरिंग पर फायरिंग होते रहे, इन गोलियों के साथ-साथ बाग के कुएं में भी लोग जान बचाने के लिए कूदने लगे और मरने लगे । हजारों मरे, तो हजारों की संख्या में लोग जख्मी हुए । इन्हीं निरीह मृतकों में हिंदी फिल्म ‘फिल्लौरी’ के नायक भी थे । शहीदों को सादर श्रद्धांजलि ।

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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