लघुकथा

तस्वीर

”मैं उपयोगी बम हूं, मुझे अपना बना लो, बंजर मिट्टी में प्यार के फूल खिला दूंगा.” चौंकाने वाली यह आवाज सुनकर प्रिया ने इधर-उधर देखा, कोई दिखाई नहीं दिया.

”शायद आपको विश्वास नहीं हुआ. होगा भी कैसे! बम का नाम लेते ही हिरोशिमा पर गिरकर तबाही मचाने वाले परमाणु बम ‘लिटिल बॉय’ की याद आती है न!”

”आप सही कह रहे हैं बम महाशय जी, हिरोशिमा पर हुए परमाणु हमले में 140,000 लोग मारे गए थे और बड़े पैमाने पर क्षति हुई थी. 4.4 टन के परमाणु बम से हमले के बाद पूरा शहर ही मलबे में ढेर हो गया था.” प्रिया की चिंता जायज थी.

”यह भी तो सोचो न, कि अमेरिका द्वारा जापान पर परमाणु हमले के साथ ही जापान ने समर्पण कर दिया और एक तरह से यह दूसरे विश्व युद्ध की निर्णायक समाप्ति का ऐलान था.” बम का कथन जारी था.

”तो क्या फिर किसी युद्ध की निर्णायक समाप्ति का ऐलान करने वाले हो!”

”मेरा इरादा तो यही है. तभी तो मैंने खुद को उपयोगी और बंजर मिट्टी में प्यार के फूल खिलाने वाला कहा है.” बम की आवाज कुछ और विनम्र-सी हो चली थी.

”चलो, फिर अपना पूरा परिचय दो.” प्रिया भी कुछ सहज हो गई थी.

”मुझे सीड बम कहते हैं. मैं मौत नहीं जिंदगी बांटता हूं, जहां खाली जगह मिले वहीं मुझे गिरा दें…..”

”तुम तो किसी युद्ध की निर्णायक समाप्ति वाली बात कह रहे थे, उसका क्या हुआ!” उत्सुकतावश प्रिया ने शायद बीच में ही टोक दिया था.

”बताता हूं, तनिक सांस लेने दो और मेरी पूरी बात सुनो. यह जो प्रदूषण, स्मॉग और ग्लोबल वार्मिंग का भयंकर प्रकोप हो रहा है न, उसका समापन मेरे उपयोग से संभव हो सकता है.” बम की आवाज विश्वसनीय हो चली थी.

”हिरोशिमा पर गिरकर तबाही मचाने वाले परमाणु बम का नाम तो ‘लिटिल बॉय’ था, आगे बढ़ने से पहले अपना नाम तो बताते चलिए!” प्रिया की जिज्ञासा तनिक बढ़ गई थी.

”मुझे ‘सीड बम’ या ‘बीज बम’ के नाम से जाना जाता है. मेरा जन्म भी अन्य अनेक तकनीकों की तरह जापान में ही हुआ है.”

”वाह! आपका काम क्या और कैसे होगा?” प्रिया की जिज्ञासा उत्कर्ष पर थी.

”पहले मेरी संरचना की जानकारी लो. बीज बम मिट्टी का गोला होता है. इसमें दो तिहाई मिट्टी और एक तिहाई जैविक खाद होती है. इसमें दो बीज अंदर धंसा दिए जाते हैं. इसे छह घंटे धूप में रखा जाता है. इसके बाद नमी रहने तक छांव में खुले में रख दिया जाता है. ठोस रूप लेते ही बीज बम तैयार हो जाता है. बारिश में मुझे जमीन पर डालने से बीज जमीन पकड़ लेता है. पोषण के लिए मुझमें पहले ही जैविक खाद रहती है.”

”वाह, बहुत बढ़िया.”

”बहुत सारे क्षेत्र ऐसे हैं जहां पौधारोपण करना मुश्किल है, विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में, वहां ‘सीड बम’ फेंकिए और निश्चिंत हो जाइए, पौधारोपण हो जाएगा और पौधारोपण का सीधा मतलब है- प्रदूषण से मुक्ति की ओर एक कदम.”

”तब तो तुम सचमुच ही उपयोगी और बंजर मिट्टी में खुशियों के सुमन खिलाने वाले हो. जरा अपनी शक्ल-सूरत तो दिखाओ न!”

अब वहां न तो बम था, न ही बम की कोई आवाज थी, बस ‘सीड बम’ की एक तस्वीर जरूर पड़ी थी, जिसे देखकर प्रिया मन-ही-मन दूसरे विश्व युद्ध की परछाइयों से लेकर सुखद भावी कल की तस्वीर बना गई थी.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “तस्वीर

  1. अतीत की परछाइयों से हम सुखद भावी कल की तस्वीर बना सकते हैं. बम नाम से ही कोई डरावना नहीं होता था, बम भी उपयोगी हो सकता है.

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