कविता पद्य साहित्य

रावण भी ऐसा ना था

जाने कैसे-कैसे निशिचर घूम रहे हैं मानव बन,
मानव रूप लिये फिरते हैं गलियों में दानव बन।
होलागढ़ थाना क्षेत्र के देवापुर गांव में अब,
नृशंसता के शिखर पे पहुंचा राक्षेश्वर रावण बन।।

ना ना गलत बोल गया हूं, रावण भी ऐसा ना था,
पापी, लोभी, रक्तपिपासू पर निर्दय ऐसा ना था।
सृष्टि और श्रेया नाम की, दो युवती के तन से खेला,
ऊंगली, छाती गुप्तांग काट दिया, रावण ऐसा ना था।।

ये तो हुई लड़की की कहानी, माता रचना तड़प रही है,
पुत्र प्रिंस का कटा शव, देख-देख कर विलख रही है।
जाने कैसे पापी थे राम, प्रिंस का तन भी काट दिया,
निर्ममता का शिखर देखकर अंदर-अंदर दहक रही है।।

पति की टांगें कटी पड़ी है, तन निर्जीव हो गया है,
विमलेश पांडे वैद्य प्रयाग का, अंत आज हो गया है।
कांप गया है गांव समूचा, दहशत में है हर जीवन,
लड़ रही मौत से प्रतिपल, हालत नाज़ुक हो गया है।

उजड़ गई बगिया सारी, कल तक जो महक रही थी,
आंगन में दो-दो बिटिया, चिड़िया बनकर चहक रही थी।
बालक प्रिंस बहुत तेज था, पर पिता से अपने डरता था,
मातम इस घर छाया है, यहां प्रेमाग्नि लहक रही थी।।

प्रदीप कुमार तिवारी
करौंदी कला कुशभवनपुर
(सुलतानपुर) उत्तर प्रदेश
7978869045

परिचय - प्रदीप कुमार तिवारी

नाम - प्रदीप कुमार तिवारी। पिता का नाम - श्री दिनेश कुमार तिवारी। माता का नाम - श्रीमती आशा देवी। शिक्षा - संस्कृत से एम ए। जन्म स्थान - दलापुर, इलाहाबाद, उत्तर-प्रदेश। मूल निवासी - करौंदी कला, शुकुलपुर, कादीपुर, सुलतानपुर, उत्तर-प्रदेश। इलाहाबाद मे जन्म हुआ, प्रारम्भिक जीवन नानी के साथ बीता, दसवीं से अपने घर करौंदी कला आ गया, पण्डित श्रीपति मिश्रा महाविद्यालय से स्नातक और संत तुलसीदास महाविद्यालय बरवारीपुर से स्नत्कोतर की शिक्षा प्राप्त की, बचपन से ही साहित्य के प्रति विशेष लगव रहा है। समाज के सभी पहलू पर लिखने की बराबर कोशिस की है। पर देश प्रेम मेरा प्रिय विषय है मैं बेधड़क अपने विचार व्यक्त करता हूं- *शब्द संचयन मेरा पीड़ादायक होगा, पर सुनो सत्य का ही परिचायक होगा।।* और भ्रष्टाचार पर भी अपने विचार साझा करता हूं- *मैं शब्दों से अंगार उड़ाने निकला हूं, जन जन में एहसास जगाने निकला हूं। लूटने वालों को हम उठा-उठा कर पटकें, कर सकते सब ऐसा विश्वास जगाने निकला हूं।।*

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